नोटबंदी के दौर में स्वैपिंग मशीन (प्वाइंट ऑफ सेल) का कारोबार तेजी से चमका है। बीते 50 दिनों में 1000 फीसदी से अधिक मांग बढ़ी है। मांग अधिक होने के कारण बैंकों के वेंडर पूर्ति ही नहीं कर पा रहे हैं। सबसे अधिक मशीनों की मांग राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं से है। पूर्ति नहीं होने की सूरत मेें कारोबारी निजी बैंकों और मोबाइल प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) की ओर बढ़ रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक पूरे जिले के लिए करीब एक लाख पीओएस की जरत है।
दरअसल, नोटबंदी के बाद छोटे-बड़े सभी कारोबारी प्रभावित हुए हैं। नोट की मार होने से कारोबार को बरकरार रखने के लिए मशीन का ही सहारा है। जिसके कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। बैंक अधिकारियों के मुताबिक नोटबंदी से पहले वर्ष भर में 25-30 मशीने लगती थीं। इसके लिए बैंकों को ग्राहकों के पास जाना होता था। अब बिल्कुल विपरीत हो गया है।
हर रोज 10-15 मशीनों के लिए आवेदन आ रहे हैं और इसके लिए ग्राहक खुद ही बैंक तक पहुंच रहे हैं। आवेदन अधिक आने के कारण बैंकों के पीओएस वेंडर पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। कई बैंकों की शाखाओं में डेढ़ माह से आवेदन लंबित है। डिजिटल भुगतान सेवा मुहैया कराने वाली कंपनियों ने पिछले डेढ़ महीने के दौरान मांग में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की है।