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नोटबंदी के दौर में चमका स्वैपिंग मशीन का कारोबार

Mon, 02 Jan 2017 11:56 PM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम
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swapping machine - फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के दौर में स्वैपिंग मशीन (प्वाइंट ऑफ सेल) का कारोबार तेजी से चमका है। बीते 50 दिनों में 1000 फीसदी से अधिक मांग बढ़ी है। मांग अधिक होने के कारण बैंकों के वेंडर पूर्ति ही नहीं कर पा रहे हैं। सबसे अधिक मशीनों की मांग राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं से है। पूर्ति नहीं होने की सूरत मेें कारोबारी निजी बैंकों और मोबाइल प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) की ओर बढ़ रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक पूरे जिले के लिए करीब एक लाख पीओएस की जरत है। 
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दरअसल, नोटबंदी के बाद छोटे-बड़े सभी कारोबारी प्रभावित हुए हैं। नोट की मार होने से कारोबार को बरकरार रखने के लिए मशीन का ही सहारा है। जिसके कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। बैंक अधिकारियों के मुताबिक नोटबंदी से पहले वर्ष भर में 25-30 मशीने लगती थीं। इसके लिए बैंकों को ग्राहकों के पास जाना होता था। अब बिल्कुल विपरीत हो गया है।

हर रोज 10-15 मशीनों के लिए आवेदन आ रहे हैं और इसके लिए ग्राहक खुद ही बैंक तक पहुंच रहे हैं। आवेदन अधिक आने के कारण बैंकों के पीओएस वेंडर पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। कई बैंकों की शाखाओं में डेढ़ माह से आवेदन लंबित है। डिजिटल भुगतान सेवा मुहैया कराने वाली कंपनियों ने पिछले डेढ़ महीने के दौरान मांग में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की है। 
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गुरुग्राम में 1 लाख मशीनों की है जरुरत

swapping machine - फोटो : अमर उजाला
​क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड के जरिए लेनदेन को कर रियायत देने की पहल के बाद इसमें और उछाल आया है। पेवर्ल्ड के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर प्रवीण ढबाई का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में छोटे और मध्यम कारोबारियों के बीच मोबाइल पीओएस मशीनों की मांग बढ़ी है। नोटबंदी के कारण जो व्यापार में ठहराव हो गया था, उसे दूर करने के लिए कारोबारी खुद चिंतित हैं। इसके कारण अब डिजिटल लेनदेन की ओर बढ़ रहे हैं।


बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक अकेले गुरुग्राम में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए 1 लाख अतिरिक्त पीओएस मशीन की जरूरत है। यहां लोगों के पास भुगतान करने की क्षमता है। हरियाणा सरकार कैशलेस को बढ़ावा दे रही है। जिसकी वजह से मशीन की मांग बढ़ रही है। एक बैंक के पास बीते 50 दिनों में हर दिन 10-15 आवेदन आए हैं।

अब भी यह आवेदन लगातार जारी हैं। सरकारी दफ्तरों से लेकर छोटे-बड़े कारोबारी इस्तेमाल कर रहे हैं। चाय वाला भी मशीन रखना चाहता है। मांग के अनुरूप करीब 14 हजार पीओएस ही स्थापित किए गए हैं। जिला अग्रणी बैंक के मैनेजर आरसी नायक कहते हैं कि 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर किए जाने की घोषणा के बाद पीओएस की मांग बैंकों के पास बढ़ गई थी। अलग-अलग बैंकों के पास अलग-अलग मांग है। 
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