इधर, पुलिस आयुक्त ने सुराग देने वालों को 50 हजार देने की घोषणा कर दी। वहीं, दो साल पहले 2016 में मुंगेर, बिहार निवासी संजय को सात साल का मासूम सलमान लखी सराय, बिहार के पास ट्रेन में घूमता मिला। खाना देकर उससे परिवार के बारे में पूछा तो वह रोने लगा।
संजय व उसके परिवार ने रहमदिल दिखाते हुए मासूम को अपनाने का फैसला किया। संजय हुसैनपुर, कपूरथला, पंजाब में नौकरी करता था। वह सलमान को वहां ले गया। फिर मासूम के परिवार की तलाश शुरू की। जानने वालों को मासूम के बारे में जानकारी दी।
पिछले दिनों संजय के पड़ोस में रहने वाली मिंता देवी दिल्ली आईं। सलमान की फोटो उसने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर देखी। महिला पोस्टर की फोटो खींचकर वापस पंजाब लौट गई। संजय को फोटो दिखाकर दिल्ली पुलिस से संपर्क की बात कही।
संजय ने पुलिस को फोन किया। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस पंजाब रवाना हो गई। सलमान के पिता ने माथे पर चोट के निशान व फोटो देखकर मासूम की पहचान कर ली। मासूम को दिल्ली लाकर सीडब्ल्यूसी में पेश किया गया। फिर औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे परिवार को सौंप दिया गया।
चार साल तक ट्रेनों में भटकता रहा
सलमान जब दिल्ली से गायब हुआ तो वह ठीक से बोल भी नहीं पता था। गलती से ट्रेन में सवार होकर भटकता रहा। लोगों ने उसे मासूम समझकर खाना दिया। घूमते घूमते 2016 में लखी सराय में संजय को मिला। तब तक मासूम सात साल का हो चुका था। दो साल संजय ने मासूम को बेटे की तरह पाला।