दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को मारने की फर्जी कॉल करने वाले युवक रविंद्र कुमार तिवारी को बरी करने संबंधी फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने जांच के तय प्रावधानों का पालन नहीं किया।
आरोपी ने वर्ष 2012 को तत्कालीन मुख्यमंत्री को धमकी दी थी। पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने पुलिस द्वारा मजिस्ट्रेट के फैसले के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए यह फैसला दिया।
अदालत ने मजिस्ट्रेट के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें आरोपी को रिहा कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि आरोपी तिवारी का अपराध संज्ञेयता पूर्ण नहीं था और बिना अदालत के जांच ठीक ढंग से नहीं की गई।
2012 में आरोपी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को मारने की फोन पर धमकी दी थी। पुलिस ने जांच के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी ने अपने मोबाइल से फोन कर शीला के घर पर बम रखने की फर्जी कॉल की थी। अदालत ने कहा था कि आरोपी ने शीला दीक्षित को सीधे कोई धमकी नहीं दी थी।