बोफोर्स तोप दलाली घोटाले में नये सिरे से जांच करने की अनुमति देने संबंधी सीबीआई की याचिका पर अब 11 मई को सुनवाई होगी। शनिवार को अतिरिक्त चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अनुज अग्रवाल ने कहा कि उनके पास केस से संबंधित दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट से नहीं आए हैं।
उन्हें वह मुहैया कराए जाएं। सीबीआई ने 1 फरवरी को तीस हजारी कोर्ट में यह याचिका दाखिल की थी। एजेंसी ने इस मामले में 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट के केस बंद करने के आदेश को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि, सीबीआई ने ऐसा अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल की उस सलाह पर जिसमें 13 साल पहले बंद मामले को फिर से शुरू करना एजेंसी की साख के लिए घातक होने की बात कहने के बाद किया।
सीबीआई ने तीस हजारी कोर्ट में अंतरराष्ट्रीय प्राइवेट इंवेस्टिगेशन एजेंसी प्रमुख माइकल हर्शमैन के नए खुलासों के बाद याचिका दायर की है। इस एजेंसी को वी पी सिंह सरकार ने बोफोर्स घोटाले के जांच की जिम्मेदारी दी थी।
बोफोर्स बनाने वाली स्वीडन की कंपनी पर आरोप था कि उसने 1,473 करोड़ रुपये की इस डील को पाने के लिए 1986 में राजीव गांधी सरकार के दौरान 64 करोड़ की घूस दी थी। हर्शमैन ने दावा किया कि उसके पास स्विस अकाउंट मॉन्ट ब्लैंक की जानकारी है जिसमें घूस की रकम को जमा किया गया था।