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Delhi: मोर्चरी में थमा दिया दूसरे का शव, परिजनों ने कर दिया अंतिम संस्कार; अस्पताल और पत्नी के कारण हुआ गोलमाल

Fri, 03 Oct 2025 09:38 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अभी प्रदीप भाई के शव का इंतजार कर ही रहे थे कि उनको पता चला कि भाई का शव अस्पताल से गायब हो गया है। दोपहर तक मोर्चरी के डॉक्टरों और पुलिस के हाथ-पांव फूले रहे। बाद में पता चला कि पंकज की लाश को गलती से एक दिन पहले ही नांगलोई के एक परिवार को पोस्टमार्टम कराकर सौंप दिया दिया गया। पुलिस ने नांगलोई में उस परिवार से संपर्क किया तो परिवार ने भी शव को अपना समझकर उसके बुधवार को ही अंतिम संस्कार करने की बात बताई। 
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भारत भूषण की जगह पर परिवार वालों ने कर दिया पंकज अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर-प्रदेश के बिजनौर के रहने वाले प्रदीप सिंह के भाई पंकज सिंह (39) की एक अक्तूबर को दिल्ली के प्रेम नगर में छत से गिरकर मौत हो गई। शव को मंगोलपुरी स्थित संजय गांधी अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया गया। पुलिस ने भी पोस्टमार्टम के लिए परिवार को दो अक्तूबर गुरुवार को संजय गांधी अस्पताल बुलाया।

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पुलिस और अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही
अभी प्रदीप भाई के शव का इंतजार कर ही रहे थे कि उनको पता चला कि भाई का शव अस्पताल से गायब हो गया है। दोपहर तक मोर्चरी के डॉक्टरों और पुलिस के हाथ-पांव फूले रहे। बाद में पता चला कि पंकज की लाश को गलती से एक दिन पहले ही नांगलोई के एक परिवार को पोस्टमार्टम कराकर सौंप दिया दिया गया। पुलिस ने नांगलोई में उस परिवार से संपर्क किया तो परिवार ने भी शव को अपना समझकर उसके बुधवार को ही अंतिम संस्कार करने की बात बताई। छानबीन में पता चला कि नांगलोई वाले भारत भूषण (45) का शव अभी भी मोर्चरी में पड़ा हुआ है। प्रदीप को जब पता चला कि पुलिस व अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से किसी ने उसके भाई का अंतिम संस्कार कर दिया तो उसने नाराजगी जताई।

प्रदीप ने अस्थियां व राख लेने से किया इनकार
उसे बताया गया कि अब उसके भाई की अस्थियां व राख श्मशान घाट में मौजूद है। प्रदीप ने उसको लेने से साफ इनकार कर दिया है। उसका कहना है कि पता नहीं यह शव उसके भाई का था या नहीं। उसने रोहिणी जिला पुलिस उपायुक्त से पुलिसकर्मियों व अस्पताल कर्मियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

यह है पूरा मामला...
मूलरूप से गांव उमरी-खदाना, धामपुर, बिजनौर निवासी पंकज सिंह अपनी पत्नी चंचल के साथ प्रेम नगर में किराए के मकान में रहते थे। इनके परिवार में पत्नी चंचल है। माता-पिता व दो भाई गांव में रहते हैं। पंकज प्राइवेट नौकरी करते थे। बुधवार तड़के नींद में यह तीसरी मंजिल की छत से नीचे गिर गए। पत्नी चंचल इनके संजय गांधी अस्पताल ले गईं।

अस्पताल पहुंचे पर पता चली अनहोनी 
अस्पताल में इनको मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने बुधवार सुबह शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया। बुधवार दोपहर के समय पंकज के बड़े भाई प्रदीप व बाकी लोग थाने पहुंचे। उनको गुरुवार शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए कहा गया। गुरुवार सुबह परिवार मंगोलपुरी स्थित संजय गांधी अस्पताल पहुंचा तो वहां पंकज का शव किसी दूसरे को देने का पता चला।

इस परिवार को दिया गया पंकज का शव...
नांगलोई के रहने वाले भारत भूषण (45) नामक व्यक्ति ने अपने घर पर फंदा लगाकर जान दे दी। पुलिस ने छानबीन के बाद उसका शव संजय गांधी अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया। बुधवार को परिवार अस्पताल पहुंचा तो नांगलोई पुलिस ने भारत के शव की उनकी पत्नी लता से दूर से पहचान करवाई।

पत्नी बोली- मुझे कम दिखाई देता है
बाद में शव का पोस्टमार्टम कराकर शव परिवार के हवाले कर दिया। परिवार शव लेकर घर पहुंचे। लता का कहना है कि उसके कम दिखाई देता है और परेशान होने के कारण उसने शव को ठीक से नहीं देखा। बाद में मर्द शव को अंतिम संस्कार के लिए नांगलोई के ही श्मशान घाट ले गए और भारत का शव समझकर अंतिम संस्कार कर दिया।

सुबह से दोपहर हुई तब शव का पता चला...
प्रदीप ने बताया कि वह सुबह करीब 8.30 बजे संजय गांधी अस्पताल की मोर्चरी पहुंच गए। 10 बजे उनके आईओ मोर्चरी पहुंचे। उनसे सारे कागजात लेने के बाद वह मोर्चरी में अंदर चले गए। परिवार बाहर शव का इंतजार करने लगा। इस बीच आईओ और मोर्चरी के कर्मचारी इधर-उधर के चक्कर काटने लगे। शुरुआत में वह कुछ भी नहीं बोल रहे थे। दोपहर 12 बजे प्रदीप को आईओ ने बताया कि उनके भाई का शव अस्पताल से गायब हो गया है। मोर्चरी के स्टाफ ने एक-एक कर सभी शवों की पड़ताल की तो पता चला कि बुधवार को जिस भारत भूषण का शव पोस्टमार्टम करके दिया गया है, उसका शव अस्पताल की मोर्चरी में है।
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पुलिस से की गई गलती की शिकायत
इसके बाद पुलिस को पता चला कि भारत भूषण के बदले मोर्चरी के स्टाफ ने पंकज का शव उनको थमाया गया है। दोपहर 2 बजे प्रदीप को जब यह पता चला तो उसने नाराजगी जाहिर की। इसके बाद उसने अस्पताल प्रशासन से मिलने का प्रयास किया, लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी, अब उसने रोहिणी जिला पुलिस उपायुक्त से शिकायत की है।
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