दिल्ली स्थित एम्स के ट्रॉमा सेंटर में शवों की अदला-बदली का मामला सामने आया है, जिसके बाद दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। दरअसल कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए थे, लेकिन अस्पताल में शव सौंपने से पहले परिजनों से शिनाख्त नहीं कराई गई।
आईटीओ स्थित कब्रिस्तान में जब परिजनों ने दूर से अंतिम दर्शन की अनुमति मांगी, तो पता चला कि वह शव उनके परिवार के सदस्य का नहीं था। शव लेकर वापस पहुंचे परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने उनकी सुनवाई नहीं की, जबकि स्थानीय पुलिस एम्स का नाम लेकर मामले को रफा-दफा करने का दबाव बनाती रही।
हालांकि परिजन सख्त कार्रवाई की मांग पर डटे रहे, जिसके चलते बुधवार को परिजनों ने पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी। इन सब के बावजूद इस घटना को लेकर लापरवाही का मामला दर्ज नहीं हुआ है।
उधर एम्स के ट्रॉमा सेंटर प्रबंधन ने शवगृह से जुड़े दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि दिल्ली में शवों की अदला-बदली का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले दिल्ली सरकार के लोकनायक अस्पताल में भी ऐसी घटना देखने को मिली थी।
मृतक महिला के भाई शरीफ खान ने बताया कि उसकी बहन अंजुमन उत्तर प्रदेश के बरेली शहर की निवासी थी। चार जुलाई को तबियत खराब होने के चलते उसे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती किया गया था, लेकिन जांच में कोरोना की पुष्टि हुई।
छह जुलाई को रात 11 बजे उसकी बहन की मौत हो गई, लेकिन डॉक्टरों ने यह सूचना देर रात दो बजे दी। इसके बाद परिवार शव लेकर जब कब्रिस्तान पहुंचा, तो वहां उन्होंने अपनी बहन को आखिरी बार देखने की मांग की। काफी मुश्किलों के बाद उन्हें यह मंजूरी मिली तो शव देखकर उनके होश ही उड़ गए। वह उसकी बहन का शव नहीं था। किसी और महिला का शव था।