मेदांता मेडिसिटी अस्पताल में रविवार को बुजुर्ग की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। शव नहीं देने से नाराज परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से गालीगलौच और धक्कामुक्की की। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों में सुलह करवाकर मामला शांत किया।
पुलिस के मुताबिक 28 मार्च को सेक्टर-10 निवासी जेएस राघव (65) को दिल की बीमारी के बाद मेदांता में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें आईसीयू में रखा। रविवार को बुजुर्ग की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को ढाई लाख का बिल थमा दिया और भुगतान के बाद ही शव को ले जाने की इजाजत देने की बात कही। इस पर परिजन भड़क गए।
बिल देने से इनकार करने पर विवाद बढ़ गया। नाराज परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से गाली गलौच शुरू कर दी। मामला बढ़ता देख पुलिस को बुलाया गया। सदर थाने से चार टीमें मौके पर पहुंच गईं। बुजुर्ग के भतीजे नरेंद्र सिंह ने बताया कि सीजीएचएस के माध्यम से मरीज को भर्ती कराया गया था, जिसमें उन्होंने साढ़े सात लाख रुपये पहले ही जमा करा दिए थे। आरोप है कि चाचा की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने जानबूझकर फर्जी बिल तैयार कर दिया।
करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद सदर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर विजय कुमार ने बुजुर्ग के परिजनों को समझा बुझाकर शांत कराया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन को डेढ़ लाख रुपये पेमेंट कर दिया, जिसके बाद उन्हें शव सौंप दिया गया। अस्पताल के प्रवक्ता ने बताया कि बुजुर्ग के परिजनों द्वारा बिल में गड़बड़ी की बात गलत है। तय नियमों के अनुसार बिल बनाया गया था। इसकी जानकारी परिजनों को पहले ही दे दी गई थी। उधर, थाना प्रभारी ने बताया कि बिल के विवाद को लेकर दोनों पक्षों में सुलह हो गई है।