चुनाव आयोग की लाख कोशिश के बाद भी चुनावों में कालेधन का प्रयोग जारी है। इसका हालिया सबूत है बीते दिल्ली विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग द्वारा जब्त किए गए 1.66 करोड़ रुपये। जिसका चुनाव बीतने के चार महीने बाद भी कोई दावेदार उन्हें लेने नहीं आया है।
यह रुपये अभी भी अलग-अलग विभागों के कोषों में जमा है। लोकसभा चुनाव में यह कम तो हुआ लेकिन बंद नहीं हुआ है। दिल्ली की सात सीटों पर चल रहे चुनाव प्रचार में अभी तक अलग-अलग इलाकों से कुल 30 लाख रुपये से अधिक जब्त किया जा चुका है।
चुनाव में काले धन का प्रयोग रोकने केलिए चुनाव आयोग अपनी टीमों के अलावा आयकर विभाग, बैंक की भी मदद लेता है। इस दौरान बैंकों के खातों पर भी नजर रहती है। जिसमें अचानक से लेनदेन बढ़ जाता है। चुनाव प्रचार में फिलहाल दस लाख से ज्यादा रुपये लेकर चलने वालों पर नजर रख रही है। अगर कोई लेकर चलता है तो उसे उसका सोर्स बताना पड़ता है। अगर वह नहीं बता पाता है तो उसपर कार्रवाई की जाती है।
दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जब्त किए गए पैसे अगर 10 लाख से ज्यादा है तो वह आयकर विभाग के पास जमा होते है। अगर उससे कम है तो दिल्ली पुलिस कोर्ट पेश कर उसे जब्त कर लेती है। वापस लेने के लिए दावेदार को कोर्ट जाना पड़ता है। चुनाव आयोग की स्वीकृति ली जाती है लेकिन अभी तक दिल्ली विधानसभा में जब्त रुपयों का दावेदारी पेश करने वाला कोई नहीं आया है।
दावेदारी करने वालों को उस पैसे का पूरी सोर्स बताना पडे़गा। उससे संबंधित दस्तावेज भी दिखाना पड़ता है। ज्वाइंट सीईओ राजेश गोयल के मुताबिक कालेधन के प्रयोग को रोकने के लिए चुनाव के दौरान सभी कैश के लेन देन पर चुनाव आयोग की नजर रहती है। कैश कोई कितना भी लेकर हमें उससे आपत्ति नहीं है।
लेकिन उसके पास उस कैश कहा से आया कहां जा रहा है उसकी जानकारी दस्तावेज के रुप में उपलब्ध होना चाहिए। दावेदार अगर वह पेश नहीं कर पाता है तो उसे जब्त कर लिया जाएगा।