फरीदाबाद के एक विशेष सक्षम व्यक्ति ने बीके अस्पताल प्रबंधन पर प्रमाण पत्र न बनाने का आरोप लगाया है।
सेक्टर-23 निवासी पारस ने बताया कि उसका बेटा सुरजीत अक्षमता सर्टिफिकेट बनवाने के लिए वर्ष 2005 से भटक रहा है। लेकिन प्रमाण पत्र नहीं मिला।
शुक्रवार को जब वह अपनी गुहार लेकर सीएमओ कार्यालय पहुंचा तो उसे कार्यालय के बाहर एक कर्मचारी ने रोक लिया। पारस ने बताया कि उसका बेटा सात माह का था जब एक गलत इंजेक्शन लगने के कारण उसका एक पैर खराब हो गया।
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बीके अस्पताल में 28 अक्टूबर 2005 को सिविल सर्जन कार्यालय में सबसे पहले अक्षमता प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। इसके बाद कार्ड पर सिविल सर्जन कार्यालय से मुहर भी लगाई गई थी। लेकिन नौ साल चक्कर काटने के बाद भी उसे सुजीत का प्रमाण पत्र नहीं मिला।
पारस ने आरोप लगाया कि इस बारे में उसने पहले भी बीके अस्पताल के भूतपूर्व सीएमओ से गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। प्रमाण पत्र न बनने के कारण उसे वह सुविधाएं नहीं मिलीं जो सरकार विशेष सक्षम लोगों को देती है।
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शुक्रवार को वह जब प्रमाण पत्र लेने के लिए आया तो कर्मचारी ने कह दिया कार्ड दोबारा बनाना पड़ेगा। इस पर पारस ने पुराने रिकॉर्ड की जांच करने को कहा। लेकिन मौके पर मौजूद कर्मचारी ने ऐसा नहीं किया।
जब उसने सिविल सर्जन डॉ. रामेंद्र से शिकायत करने की कोशिश की तो कार्यालय के बाहर तैनात कर्मचारी ने उसे बाहर कर दिया।
इसके बाद किसी अन्य अधिकारी की सहायता लेकर उसने इसकी सूचना सीएमओ डॉ. रामेंद्र सिंह को दी। इस बारे में सीएमओ डॉ. रामेंद्र सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी मिल गई है। पीड़ित को बुधवार को बुलाया गया है। पीड़ित पक्ष की पूरी सहायता की जाएगी।