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उत्तराखंड की हार से चुनावों में सबक लेगी भाजपा

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उत्तराखंड में हुए विधानसभा उपचुनाव में करारी हार के बाद भाजपा हाईकमान कोई जोखिम उठाने को तैयार नहीं है। संगठन ने नोएडा में होने वाले उपचुनाव के लिए गहन मंथन शुरू कर दी है।
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विधानसभा सीट के लिए नवनिर्वाचित सांसद डॉ. महेश शर्मा ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने परिवार के किसी सदस्य के लिए टिकट नहीं मांगेंगे।

उधर, स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता साफ कह चुके हैं कि वे किसी बाहरी प्रत्याशी को बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह भी पक्का है कि प्रत्याशी के चयन में सिर्फ पार्टी मुखिया अमित शाह की ही चलेगी।
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2012 में बनी थी नोएडा व‌िधानसभा

दरअसल, वर्ष 2012 में नए परिसीमन के दौरान नोएडा विधानसभा बनी थी। पहली बार विधायक बनने का मौका भाजपा के डॉ. महेश शर्मा (27,676 वोटों से जीत) को मिला था।

2014 के लोकसभा चुनाव में डॉ. महेश शर्मा 2.80 लाख वोटों से जीतकर सांसद चुने जा चुके हैं। अब सीट पर उपचुनाव होना है।

पार्टी के सूत्र बताते हैं कि प्रदेश में उपचुनाव अक्तूबर के अंत या फिर नवंबर शुरू में होना तय है। केवल इसकी घोषणा होनी बाकी है।
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कोई नहीं जानता क‌िसे म‌िलेगी ‌ट‌िकट

फिलहाल यह कोई दावा नहीं कर सकता है कि टिकट किसको मिलेगा। इसके पीछे पार्टी सूत्रों ने बताया कि दो दिन पहले दिल्ली में पार्टी मुखिया अमित शाह ने उत्तराखंड में हुई हार की समीक्षा की थी।

बताया जाता है कि वहां पर टिकट बंटवारे के दौरान स्थानीय संगठन की अनदेखी की गई थी। जिसके चलते ही हार का सामना करना पड़ा। लोकसभा चुनाव के दौरान प्रदेश में भाजपा के 73 सांसद चुने गए थे, पार्टी कभी नहीं चाहेगी कि वह किसी ऐसे प्रत्याशी पर दांव लगाए जो हार का कारण बने।

इसलिए यह तो स्पष्ट है कि टिकट उसी को मिलेगा जिसकी संगठन, पार्टी और नोएडा की जनता में अच्छी इमेज होगी। इस मानक में चुनिंदा लोग ही हैं जो टिकट के लाइन में खड़े हो सकेंगे।
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