'गुरुद्वारे आस्था के केंद्र हैं, राजनीतिक अखाड़े नहीं'
अल्पसंख्यक आयोग को सौंपे गए पत्र में आरपी सिंह ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख अरविंद केजरीवाल के समर्थकों और वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े लोगों ने एक प्रमुख सिख तीर्थ स्थल का इस्तेमाल राजनीतिक मंच के रूप में किया है। उन्होंने चिंता जताई कि राजनीतिक फायदों के लिए गुरुघर की पवित्रता और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ किया गया है।
'राजनीतिक एजेंडा गुरुघर की पवित्रता से ऊपर नहीं'
आरपी सिंह ने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति किसी एक दल या विचारधारा विशेष से नहीं है, बल्कि धार्मिक स्थलों के सम्मान को बनाए रखने के सिद्धांत से है। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा बंगला साहिब प्रार्थना, आध्यात्मिक शांति और सेवा की जगह है, न कि राजनीतिक तमाशे का मंच। राजनीतिक अभिव्यक्ति के अधिकार का यह अर्थ नहीं कि आप किसी धार्मिक स्थल की गरिमा को ताक पर रख दें। कोई भी राजनीतिक एजेंडा गुरुघर की पवित्रता से ऊपर नहीं हो सकता।
डीएसजीएमसी ने भी की निंदा
इस बीच, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने भी गुरुद्वारा परिसर में विरोध प्रदर्शन या राजनीतिक गतिविधि के प्रयास की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि इससे सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं और उन्होंने दिल्ली के आप विधायकों पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। कालका ने जोर देकर कहा कि धार्मिक संस्थान वे पवित्र स्थल हैं जहां लोग प्रार्थना करने और मानसिक शांति पाने आते हैं, इन्हें राजनीतिक अरण्य (अखाड़े) में नहीं बदला जाना चाहिए।
आयोग के सामने रखी गई 5 सूत्रीय मांगें
तत्काल संज्ञान: अल्पसंख्यक आयोग इस घटना का तुरंत संज्ञान ले और दिल्ली पुलिस तथा गुरुद्वारा प्रबंधन से तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब करे।
पुलिस जांच: दिल्ली पुलिस को निर्देशित किया जाए कि वह गुरुद्वारा परिसर के भीतर राजनीतिक सभा, नारेबाजी और तख्तियां लहराने की पूरी घटना की निष्पक्ष जांच करे।
कानूनी कार्रवाई: जहां भी संज्ञेय अपराध बनता है, वहां प्राथमिकी दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
धार्मिक भावनाओं की रक्षा: पूरे मामले को सिख धार्मिक भावनाओं और अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा के नजरिए से परखा जाए।
स्पष्ट दिशा-निर्देश: भविष्य में धार्मिक परिसरों का राजनीतिक गतिविधियों के लिए दुरुपयोग रोकने हेतु आयोग द्वारा कड़े सुरक्षा उपाय और दिशानिर्देश जारी किए जाएं।
बंगला साहिब में नारेबाजी के पीछे आप की साजिश : गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने आम आदमी पार्टी (आप) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका और महासचिव सरदार जगदीप सिंह काहलों ने आरोप लगाया कि आप संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों ने राजनीतिक कार्यकर्ताओं को भेजकर गुरुद्वारा परिसर में नारेबाजी करवाई। इस मामले में कमेटी ने नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त के पास केजरीवाल और उनके साथियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
कालका और काहलों ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गुरु घर की मर्यादा सर्वोपरि है और इसमें किसी भी तरह का व्यवधान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपने थैलों में बैनर और नारे लिखी तख्तियां लेकर गुरुद्वारा पहुंचे थे। वहां इन्हें निकालकर नारेबाजी शुरू कर दी गई। उनके मुताबिक, यह सब सोची-समझी योजना के तहत किया गया, ताकि गुरु घर को राजनीतिक विवाद में घसीटा जा सके।
कमेटी पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो प्रसारित कर गलत नैरेटिव बनाने और गुरुद्वारा साहिब को बदनाम करने की कोशिश की गई। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, वित्त मंत्री हरपाल चीमा और आप की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमन अरोड़ा सहित पार्टी नेतृत्व पर भी गुरु घर को विवाद में घसीटने का आरोप लगाया। कालका और काहलों ने कहा कि पुलिसकर्मी अशोका रोड की ओर से गुरुद्वारा परिसर में दाखिल हुए थे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद दूसरे गेट से पुलिस मुख्यालय की ओर निकल गए। उनके अनुसार, पुलिसकर्मी दरबार हॉल की सीढ़ियों तक नहीं गए और न ही दरबार हॉल या लंगर हॉल में प्रवेश किया। उन्होंने दावा किया कि इन दोनों स्थानों पर जाने के लिए सिर ढकना और जूते उतारना अनिवार्य है।
कमेटी पदाधिकारियों ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब में श्रद्धालुओं का माथा टेकने, लंगर छकने और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए स्वागत है, लेकिन धार्मिक परिसर में राजनीतिक नारेबाजी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कुछ पूर्व प्रबंधकों पर भी इस मामले में राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पंथक विरोध प्रदर्शन करना हो, तो वह गुरुद्वारा साहिब के बाहर किया जाना चाहिए।