दिल्ली से नवनिर्वाचित भाजपा सांसद
- फोटो : रवि बत्रा
हाल ही में भारी जनसमर्थन पाने वाले दिल्ली के सांसद राज्य से भाजपा का 22 साल का वनवास खत्म करेंगे। पार्टी ने विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इन सांसदों को अगले 100 दिन के भीतर जनता को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी है।
वर्ष 1993 के बाद से अब तक भाजपा को विधानसभा चुनाव में दिल्ली की जनता का साथ नहीं मिला है। इसीलिए पार्टी अब अलग रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत पहले काम, फिर नाम के जरिये जनता में विश्वास पैदा किया जाएगा। इसकी एक झलक पूर्वी दिल्ली में देखी भी जा सकती है। यहां पिछले तीन दिन से शपथ लेने से पहले ही गौतम गंभीर बुनियादी सेवाएं दिलाने के लिए अफसरों के साथ बैठकें करते जा रहे हैं। वे यमुना क्रीडा स्थल को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में तब्दील कराने और पूर्वी दिल्ली में महिला सुरक्षा को लेकर अब तक डीडीए और दिल्ली पुलिस के आला अफसरों से मुलाकात कर चुके हैं।
सूत्रों का कहना है कि पार्टी चाहती है कि दिल्ली के लोग पहले उनके जनप्रतिनिधियों का काम देखें, ताकि जनता के सामने साफ हो कि उसकी कार्यशैली विपक्षियों से कितनी अलग है? लोकसभा चुनाव में पार्टी को भारी बहुमत मिला है। इसीलिए पार्टी चाहती है कि दिल्ली के सातों सांसद अपने क्षेत्रों में एक्टिव हों और जनता से जुड़े मुद्दों पर काम करें। फिर बात चाहे सुरक्षा की हो या बिजली-पानी की। प्रदेशाध्यक्ष और उत्तर पूर्वी दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी का कहना है कि दिल्ली में भाजपा का वनवास तभी खत्म हो सकता है, जब जनता का विश्वास उनसे जुड़ेगा। उन्होंने कहा कि दिल्लीवाले भाजपा और पीएम मोदी पर भरोसा करते हैं।
वे लोगों से यही अपील करते हैं कि एक बार भाजपा को मौका देकर देखें। केंद्र में मोदी और दिल्ली में भाजपा आने के बाद चहुंओर विकास ही विकास होगा। उन्होंने यहां तक कहा कि ऐसा नहीं होता है तो जनता चाहे भाजपा को फिर से वनवास में भेज सकती है।
उधर, दिल्ली भाजपा से जुड़े एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों की समीक्षा भी पार्टी ने अंदरखाने शुरू कर दी है। किन विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा आगे रही, कहां क्या-क्या मुद्दे सामने आए और किन क्षेत्रों में बुनियादी स्तर पर काम करने की जरूरत है, पार्टी इनका खाका तैयार करने में जुटी है। इसके अलावा, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना और 10 फीसदी गरीब सवर्ण आरक्षण कानून भी भाजपा को आगे लेकर आ सकते हैं।