मोदी मैजिक के चलते भारतीय जनता पार्टी ने इस औद्योगिक शहर में कांग्रेस के पुराने किले को ध्वस्त कर दिया, जबकि पलवल में उसका जादू नहीं चला।
यदि लोकसभा (फरीदाबाद-पलवल की 9 विधानसभा) क्षेत्र की बात करें तो कांग्रेस और भाजपा की राजनीतिक कुश्ती बराबरी पर छूटी है। दोनों ने तीन-तीन सीटें ली हैं। इसके साथ ही जीते हुए नौ रत्नों के घरों पर दिवाली के दीप जले और हारे हुए लोगों के दिल जले।
फरीदाबाद जिले के परिणाम को देखें तो पिछली बार यहां पर छह में से चार सीटें कांग्रेस के पास थीं, जिनमें से इस बार तीन पर भाजपा ने अपना परचम लहराया है।
सबसे दिलचस्प लड़ाई तिगांव सीट पर देखी गई। यह सीट भाजपा चूक गई। विश्लेषकों का कहना है कि यदि किसी पार्टी कार्यकर्ता को टिकट मिलता तो केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर की यह पारंपरिक सीट हाथ से न निकलती।
भाजपा ने रातोंरात बदला था उम्मीदवार
लोकसभा चुनाव से पूर्व इस सीट पर गुर्जर खुद विधायक थे। इसलिए चुनाव कोई भी लड़े, इससे उनकी प्रतिष्ठा जुड़ी हुई थी।
उन्होंने अजय बैंसला, ओम प्रकाश रक्षवाल और उमेश भाटी जैसे कार्यकर्ताओं को छोड़कर बिल्डर लॉबी से आने वाले कांग्रेसी नेता को रातोंरात भाजपाई बनाकर मैदान में उतार दिया और अंतत: राजेश नागर को हार का सामना करना पड़ा। कहा जा रहा है कि गुर्जर तीन सीटें जीतकर भी अपनी पारंपरिक सीट की वजह से राजनीतिक दुनिया में हार गए।
दूसरी ओर सीमा त्रिखा ने कांग्रेस के दिग्गज नेता और पांच बार विधायक रहे महेंद्र प्रताप सिंह को बड़खल विधानसभा क्षेत्र से शिकस्त दी। महेंद्र प्रताप को हराना त्रिखा के लिए आसान नहीं था। क्योंकि इस साधारण कार्यकर्ता को घेरने के लिए इंडियन नेशनल लोकदल से उन्हीं की बिरादरी के चंदर भाटिया (पूर्व विधायक) खड़े हो गए थे।
शारदा के आंसुओं ने दिला दी भाजपा को जीत!
यही नहीं सीमा त्रिखा के खिलाफ इनेलो की ओर से पूर्व मंत्री एसी चौधरी भी दिनरात एक किए हुए थे। लेकिन राजनीति में पंजाबी बिरादरी के प्रतिनिधित्व के लिए त्रिखा के नाम पर पंजाबियों ने एकतरफा वोट डाला।
बल्लभगढ़ से मूलचंद शर्मा की राह शारदा राठौर के आंसुओं ने आसान कर दी थी। कांग्रेस नेत्री के चुनाव न लड़ने के फैसले ने यहां पर पार्टी का सूपड़ा साफ कर दिया।
रही बात एनआईटी की तो यहां पर शिवचरण लाल शर्मा के खिलाफ गुर्जर लॉबी एकत्र हो गई और पूर्वांचल के वोटों का बिखराव हुआ, जिससे इनेलो के नागेंद्र भड़ाना ने ताज पहना। जबकि फरीदाबाद शहरी सीट पर प्रवेश मेहता की खिलाफत भी विपुल गोयल को जीत का सेहरा बांधने से रोक नहीं पाई। शहरी मतदाताओं ने इनेलो को नकार दिया।