दिल्ली विधानसभा चुनाव में अब चंद दिन ही शेष रह गए हैं। माना जा रहा है कि छह-सात जनवरी के लगभग विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी हो सकती है। लेकिन भाजपा आलाकमान चुनाव में चेहरे को लेकर अभी तक एक राय नहीं बना पाया है। पार्टी में अभी भी इस बात को लेकर मंथन जारी है कि पार्टी के लिए किसी चेहरे के साथ चुनाव में उतरना बेहतर साबित होगा या बिना चेहरे के मैदान में उतरने की रणनीति ज्यादा कारगर रहेगी। इस मुद्दे पर पार्टी में गहन चर्चा जारी है।
पार्टी में एक बात पर सहमति है कि वह यह चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनाम अरविंद केजरीवाल नहीं होने देना चाहती। पार्टी के शीर्ष नेताओं का स्पष्ट मत है कि ऐसा होने की स्थिति में जनता को अरविंद केजरीवाल बेहतर विकल्प दिख सकते हैं क्योंकि अंततः यह चुनाव दिल्ली के मुख्यमंत्री को चुनने को लेकर है। इस तरह इसका फायदा आम आदमी पार्टी को मिल सकता है। वहीं, पार्टी के सामने इस बात की भी दुविधा है कि अगर वह नाम घोषित करती है तो पार्टी गुटबाजी की शिकार हो सकती है। इसका खामियाजा उसे पूर्व के चुनावों में भुगतना पड़ा है। यही कारण है कि वह इस मुद्दे पर बहुत सोच-समझकर कोई कदम उठाने के मूड में है।
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक सोमवार देर रात पार्टी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष की राष्ट्रीय कार्यालय पर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और दो अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ एक बैठक हुई। बैठक में नेतृत्व के मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया गया। बैठक में कुछ प्रमुख चेहरों पर भी चर्चा हुई जिन पर नेतृत्व की उम्मीदवारी को लेकर विचार किया जा सकता है। लेकिन पार्टी नेताओं में इस मुद्दे पर एक राय नहीं बन सकी।
पार्टी के सामने क्या हैं विकल्प
दिल्ली को लेकर पार्टी में तीन चेहरों को प्रमुख रूप से दावेदार बताया जा रहा है। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी प्रमुख हैं। तीनों ही नेताओं की राजधानी के एक वर्ग पर पकड़ है। विजय गोयल व्यापारी समुदाय में अच्छी पकड़ वाले नेता माने जाते हैं और संगठन पर भी अच्छा प्रभाव रखते हैं। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व उनकी सांगठनिक क्षमता का कायल है। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके काम की तारीफ कर चुके हैं। उनका राज्यसभा का कार्यकाल भी खत्म होने वाला है। जिस तरह उन्हें राज्यसभा में दोबारा नहीं लाया गया और उनके दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी चल रही है, उसके भी मायने निकाले जा रहे हैं।
वहीं, केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन पार्टी के साफ-स्वच्छ छवि के नेता माने जाते हैं। पिछले दिनों प्रदूषण के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल सरकार को घेरने के लिए पार्टी ने जिस तरह अचानक उन्हें आगे किया उसके भी अर्थ निकाले जा रहे हैं। हालांकि, मनोज तिवारी दिल्ली के पूर्वांचल समाज के बीच एक लोकप्रिय चेहरे के रूप में देखे जाते हैं। अन्य समाज के बीच भी उनकी अच्छी छवि बनी हुई है। पार्टी के लिए वे एक भीड़ जुटाऊ नेता साबित हुए हैं। दिल्ली में वे पार्टी के एक चेहरा साबित हुए हैं। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की नजर में भी उनकी स्थिति बेहतर बताई गई है।
इसी चुनावी हलचल के बीच पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद प्रवेश वर्मा का भी नाम तेजी के साथ उभरा है। युवा चेहरा और साहिब सिंह वर्मा की विरासत भी उन्हें मजबूत कद प्रदान करती है। पार्टी के लिए जिस तरह जाट वोट समस्या बनकर उभरे हैं, उनके बीच पार्टी के लिए उनकी अहमियत बढ़ गई है। उन्हें भी नेतृत्व के मसले को लेकर बड़ा दावेदार बताया जा रहा है।