बिसाहड़ा कांड के सवा दो महीने बाद सोमवार को साध्वी द्वारा ग्रामीणों के साथ गंगाजल और गौमूत्र से गांव के शुद्धिकरण के लिए की जाने वाली आराध्य रैली नहीं हुई।
मंदिर में भी इस तरह का कोई आयोजन नहीं कर सिर्फ भजन-कीर्तन किया गया। इस आयोजन की चर्चा से एक बार फिर तनाव की स्थिति पैदा हो गई और गांव में पुलिस तैनात रही।
माहौल बिगड़ने से बचाने के लिए पुलिस ने इस तरह का आयोजन नहीं करने दिया। तहसील दादरी क्षेत्र के गांव बिसाहड़ा में 28 सितंबर को हुए उपद्रव के बाद अब करीब एक सप्ताह से गांव के माजरा ककरेट के मंदिर में साध्वी हर सिद्धी गिरी आई हैं।
गांव में गौ मूत्र एकत्र किया जा रहा था
वह गांव की महिलाओं के साथ कीर्तन और भागवत कथा पढ़ती हैं। सोमवार को गांव के शुद्धिकरण के लिए गौमूत्र और गंगाजल का छिड़काव कराने की घोषणा की गई थी, जिसके लिए गांव में गौ मूत्र एकत्र किया जा रहा था। बनारस से गंगाजल भी मंगाया गया था।
गंगाजल से शुद्धिकरण कराने के कार्यक्रम की सूचना प्रशासन को मिलने पर रविवार को उपजिलाधिकारी राजेश कुमार और पुलिस क्षेत्राधिकारी अनुराग सिंह ने गांव का दौरा किया।
पुलिस प्रशासन ने शुद्धिकरण कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगा दिया। सोमवार सुबह से ही गांव में जारचा कोतवाली पुलिस के अलावा ग्रेटर नोएडा के कई थानों के पुलिस बल और पीएसी तैनात कर दिए गए।
ग्रामीणों ने रोजाना की तरह कीर्तन किया
नाकाबंदी करने के बाद गांव के हर रास्ते पर दिन भर पुलिस और पीएसी तैनात रहे। उधर, सुबह 11 बजे गांव के मंदिर में बने र्कीतन हॉल में ग्रामीणों ने रोजाना की तरह कीर्तन किया।
ग्रामीणों ने बताया कि वे कई साल से इस मंदिर में कीर्तन करते रहे हैं। कीर्तन के बाद प्रसाद बांटा गया। इस दौरान साध्वी के आसपास पुलिसकर्मी तैनात रहे। महिला कोतवाल को उनकी सुरक्षा के लिए लगाया गया था।
साध्वी द्वारा शुद्धिकरण रैली की जानकारी मिलते ही गांव में एक बार फिर मीडिया का जमावड़ा लग गया। पुलिस और मीडिया को देखकर ग्रामीण भड़क गए।
मीडियाकर्मियों को गांव के गेट के बाहर तक खदेड़ दिया गया, जहां वे पूरे दिन जमे रहे। आरोप है कि एक-दो मीडियाकर्मियों से मारपीट भी की गई। पुलिस ने किसी भी हालत में साध्वी से गांव में रैली नहीं निकालने देने की बात कही। प्रतिबंध के चलते रैली निकालने का विचार छोड़ दिया गया।
साध्वी को दी कार्रवाई की चेतावनी
साध्वी हर सिद्धी गिरी ने बताया कि उन्होंने अपनी मर्जी से कार्यक्रम रद्द नहीं किया। उनके ऊपर प्रशासन और पुलिस का बहुत अधिक दबाव था। ग्राम प्रधान ने भी निवेदन किया कि रैली को रद्द कर मंदिर में ही भजन और कीर्तन कर लिया जाए। बार-बार पुलिस से चेतावनी मिल रही थी।
इसके चलते ही कार्यक्रम बदल दिया गया। बिसाहड़ा कांड के बाद गांव देश-विदेश में चर्चा का विषय बना होने से ग्रामीणों में बेहद नाराजगी है। लोगों का मानना है कि इसके चलते गांव के लोगों को काफी क्षति हुई है। ग्रामीणों ने अब इस मुद्दे को नहीं उछालने का अनुरोध किया है।
ग्राम प्रधान संजय राणा ने कहा कि गांव में अब शांति है। सभी अपने-अपने कार्यों में लगे हैं। एक-दूसरे के यहां आना जाना है। ग्रामीण अब उस घटना पर कोई टिप्पणी नहीं चाहते हैं।
अफवाहें फैलने से गांव में अशांति का माहौल बन जाता है
पूरन सिंह का कहना है कि एक बार फिर मुद्दा उछलने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। अफवाहें फैलने से गांव में अशांति का माहौल बन जाता है।
प्रदीप का कहना है कि पूर्व में हुई घटना से गांव के लोग अभी तक नहीं उबर पाए हैं। फिर से मीडिया का जमावड़ा होने लगा है, जो गांव और समाज के हित में नहीं है।
राकेश का कहना है कि गांव के लोगों को अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए। मीडियाकर्मी बिना वजह किसी बात को अधिक बढ़ा-चढ़ा कर नहीं लिखें।