सोने और चांदी पर लगने वाला बीआईएस (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्स) होलोग्राम मार्क अब मेडिकल उपकरणों पर भी दिखाई देगा। भारत में बनने वाले सभी मेडिकल उपकरणों के लिए सरकार एक गाइडलाइन तय करेगी। बृहस्पतिवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय सहित 15 मंत्रालयों के सचिव की बैठक में यह निर्णय लिया है। हालांकि ये फैसला विदेशों में बन रहे उपकरणों पर लागू नहीं होगा।
एक वरिष्ठ संयुक्त सचिव ने बताया कि अभी तक यूएस एफडीआई के मानकों का अनुसरण भारत में किया जाता है। खासतौर पर ब्लड शुगर, एमआरआई, सीटी स्कैन जैसी जांच करने वाले उपकरण भी यूएस मानकों पर तैयार होकर भारत में आते हैं। जबकि अपने ही देश में कई स्टॉर्टअप कंपनियां और भी ज्यादा बेहतर मशीनें तैयार करती हैं।
मगर इनके लिए यूएस मानकों पर खरा उतरना मुश्किल होता है। इसलिए लंबे समय से भारतीय मेडिकल उपकरण निर्माण जगत में स्वदेशी कानून की मांग चली आ रही थी। इस पर काम शुरू हो चुका है। बैठक में बीआईएस मार्क के अलावा इन मशीनों की गुणवत्ता की जांच की जिम्मेदारी ड्रग कंट्रोल विभाग को सौंपी गई है।
भारतीय उपकरण हो सकते हैं कर मुक्त
सूत्रों के अनुसार बैठक में यह भी चर्चा हुई है कि बाजार में चीन, जापान और कोरिया की काफी कम दामों पर डिजिटल मशीन उपलब्ध हैं। लोग अपने घरों में महज एक से दो हजार रुपये की कीमत वाली इन मशीनों के जरिए स्वास्थ्य जांच करते हैं। जबकि गुणवत्ता की बात करें तो स्वदेशी मशीनें ज्यादा बेहतर तरीके से काम करती हैं, लेकिन इनकी कीमत ज्यादा होती है।
जल्द ही केंद्र सरकार अन्य देशों की भांति भारतीय उपकरणों की कीमत कम करने के लिए इन्हें कर मुक्त करने का फैसला ले सकती है। कच्चे माल पर आयात शुल्क कम हो सकता है और पूरी तरह निर्मित उपकरणों पर यह शुल्क बढ़ाने की सिफारिश बैठक में हुई है।