निजी और सरकारी अस्पतालों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय प्रशिक्षण देगा।
जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 में जुड़े नए प्रावधान के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके लिए दिल्ली-एनसीआर के सभी अस्पतालों के चिकित्सा अधिक्षक व अधिकारियों की बैठक 16-18 अक्तूबर तक दिया जाएगा।
नए नियम में मेडिकल वेस्ट को हैंडल करने वालों की सुरक्षा और देखभाल पर जोर दिया गया है। दरअसल, भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 (जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016) लागू कर दिए हैं।
नए नियमों में एनाटॉमिकल वेस्ट में मानव भ्रूण को भी शामिल किया गया है। जिसके तहत बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन से जुड़ी पूरी व्यवस्था को अब वेबसाइट पर अपलोड करना पड़ेगा।
इसमें सेटिंग, बार कोडिंग आदि शामिल है। कचरा कलेक्शन वैन पर जीपीएस लगेगा। वेस्ट कलेक्शन बैग को सीधे इन्सीनरेटर में डाला जा सकेगा।
बता दें कि हाल ही में एनजीटी द्वारा गठित जांच कमेटी ने पाया था कि बड़े अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा अब नए कानून पर अमल भी किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक नए नियम में मेडिकल वेस्ट को हैंडल करने वालों की सुरक्षा और देखभाल पर जोर दिया गया है।
इसके लिए रिव्यू कमेटी बनेगी, मिनिट्स तैयार होंगे। मॉनिटरिंग की जाएगी। रिपोर्ट भी बनेगी। इससे यह पता चल सकेगा कि सब ठीक हो रहा है कि नहीं।
बायोमेडिकल वेस्ट के सेग्रीग्रेशन के बाद डोर टू डोर कलेक्शन, उसका ट्रीटमेंट, डिस्पोजल आदि की पूरी जानकारी वेबसाइट पर लोड रहेगी। इससे पता चलेगा कि कितना वेस्ट निकल रहा है। उसका निष्पादन कैसे किया जा रहा है।