नगर निगम के टैक्स डिपार्टमेंट में बड़ा घपला किया जा रहा है। टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से चार से पांच गुना रकम बढ़ाकर बिल भेजे जा रहे हैं।
मकान मालिक के आपत्ति जताने पर सेटिंग कर बिल को कम कर लिया जाता है और बाकी की रकम में से 50-50 फीसदी बांट ली जाती है।
ऐसे कई मामले निगम पार्षदों और नगर आयुक्त ने पकड़े हैं। नगर आयुक्त ने मामलों पर जांच बैठा दी है।
सिटी जोन और मोहन नगर जोन में सबसे ज्यादा प्रकरण सामने आए हैं। सिटी जोन में एक दुकानदार के पास हाउस टैक्स का हजारों का बिल लाखों में बना दिया।
दुकानदार ने नगर आयुक्त अब्दुल समद से शिकायत की। मोहननगर जोन में कार्यकारिणी समिति के सदस्य बाबू सिंह आर्य ने 8 मामले ऐसे पकड़े हैं।
एक कामर्शियल बिल्डिंग पर 8 लाख का टैक्स निर्धारण कर बिल भेजा गया, लेकिन बाद में इसमें साठगांठ कर महज 2 लाख रुपये में निपटा दिया गया।
वेल्युअर की रिपोर्ट बनी ‘ढाल’
टैक्स डिपार्टमेंट के इस ‘खेल’ में वेल्युअर की रिपोर्ट को ढाल बनाया जाता है। कई गुना बढ़ाकर भेजे गए बिल को कम करने के लिए निगम अधिकारी ही भवन मालिक से मकान की वेल्यूएशन रिपोर्ट मांगते हैं।
निगम द्वारा निर्धारित वेल्युअर इसी रिपोर्ट में खेल कर भवन की कीमत का आकलन कम कर देते हैं। इसे आधार बनाकर टैक्स कम कर जमा कर लिया जाता है।
मेरे संज्ञान में आए 8 मामलों के दस्तावेज मंगाए गए हैं। दस्तावेज मिलने के बाद मामला नगर आयुक्त और सदन के संज्ञान में लाकर जांच कराई जाएगी। कर्मचारी ही निगम को आर्थिक हानि पहुंचा रहे हैं। - बाबू सिंह आर्य, कार्यकारिणी समिति सदस्य