- पीडब्ल्यूडी पीपीपी मॉडल के लिए कैबिनेट प्रस्ताव तैयार करने में जुटा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने, फंडिंग समस्याओं से बचने और लागत वृद्धि को रोकने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल अपनाने पर विचार कर रही है। बड़े प्रोजेक्ट को केवल सार्वजनिक फंड से पूरा करने में फंडिंग की समस्याएं आती हैं, जिससे कई परियोजनाएं देरी से पूरी होती हैं। इसलिए, सरकार अब उच्च लागत वाले पूंजीगत प्रोजेक्ट को पीपीपी मॉडल के तहत लागू करने की योजना बना रही है।
इस मॉडल के तहत परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा और जल क्षेत्रों में फ्लाईओवर, पुल, कार्यालय परिसर, अस्पताल, और स्कूल जैसे प्रोजेक्ट विकसित किए जाएंगे। इस संबंध में बुधवार को पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में पीडब्ल्यूडी को इस मॉडल के लिए कैबिनेट प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिए गए हैं। पीडब्ल्यूडी को 500 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट्स, जैसे फ्लाईओवर, अंडरपास, अस्पताल, और स्कूल, को इस मॉडल के तहत लागू करने का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। हालांकि, यह सीमा 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट के लिए भी हो सकती है।
अधिकारियों ने बताया कि पीपीपी मॉडल में सरकार निजी कंपनी के साथ अनुबंध करती है और उसे प्रोजेक्ट के लिए जमीन उपलब्ध कराती है। निजी कंपनी प्रोजेक्ट को लागू करती है और उसका रखरखाव करती है। कंपनी विज्ञापनों, पेट्रोल पंप, टोल टैक्स, और जमीन को दुकानों के लिए लीज पर देकर उपयोगकर्ता शुल्क के माध्यम से राजस्व अर्जित करती है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने कुछ राजमार्ग और एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को पीपीपी मॉडल के तहत सफलतापूर्वक लागू किया है।
- पीपीपी मॉडल पर कई परियोजनाओं पर हो रहा काम
अधिकारियों ने बताया कि परिवहन विभाग पीपीपी माॅडल के तहत अपनी जगहों को लीज पर देकर राजस्व अर्जित कर रहा है। मसलन दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) बस स्टॉप पर एआई आधारित वाटर कूलर प्रोजेक्ट को पीपीपी मॉडल के तहत लागू किया गया है। इसमें निजी कंपनी वाटर एटीएम स्थापित करती है और बदले में विज्ञापनों के लिए जगह का उपयोग करती है। इसी तरह, छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को नालों पर स्थापित करने के लिए भी पीपीपी मॉडल का उपयोग किया जा रहा है, जहां निजी कंपनियां विज्ञापनों के माध्यम से राजस्व अर्जित करती हैं।
फंड की कमी से परियोजनाओं में होती है देरी
अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2020 और 2021 में दिल्ली में 11 नए अस्पतालों के निर्माण की परियोजना शुरू की गई थी। फंड की कमी के कारण इनके निर्माण देरी हुई है। इन परियोजनाओं के लिए करीब 10,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। देरी के कारण लागत में 50 फीसदी की वृद्धि हो चुकी है। सार्वजनिक फंड के उपयोग में सरकार को एक सीमा का पालन करना पड़ता है, जिसके कारण पीपीपी मॉडल को अपनाने से समय पर प्रोजेक्ट पूरे होने, लागत वृद्धि और भ्रष्टाचार से बचा जा सकता है।