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दिल्ली विधानसभा चुनावः बिधूड़ी का दावा, दिल्ली में सरकार बनाएगी भाजपा

Wed, 15 Jan 2020 05:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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रमेश बिधूडी - फोटो : ANI
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भाजपा इस बार मुख्यमंत्री के चेहरे बगैर चुनाव लड़ रही है। सबसे बड़ी चुनौती भाजपा के लिए आप सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी है। पिछले चुनाव में महज 3 विधायक जीते थे। इस चुनाव में सत्ता तक पहुंचने के दावे के साथ चुनावी मैदान में है। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर छात्र सड़क पर हैं। इन तमाम सवालों पर दिल्ली के सांसद रमेश बिधूड़ी से हुई ‘अमर उजाला’ संवाददाता नवनीत शरण की विशेष बातचीत।

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भाजपा को दिल्ली की जनता वोट क्यों दे? 
-इसलिए देगी कि आप सरकार झूठ बोलती है। पिछले चुनाव में 70 वादे किए थे, लेकिन एक भी पूरा नहीं किया। 500 स्कूल बनाने के वादे किए गए थे। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सिर्फ 10 कॉलोनी के नाम बता दें जहां उन्होंने नए स्कूल-कॉलेज खोले हैं।

मुफ्त का फायदा अगले 5 साल क्यों ना उठाए दिल्ली वाले?
-जनता जानती है कि कोई भी नई सरकार आएगी तो इस योजना को खत्म नहीं कर सकती। लोकतंत्र की सरकार है। अगर वर्तमान सरकार 200 यूनिट बिजली मुफ्त दे रही है तो किसी भी पार्टी की नई सरकार 1 यूनिट भी इसमें बदलाव नहीं कर सकती। दिल्ली की जनता सब जानती है।
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पिछले चुनाव में महज 3 सीटें मिली थीं, इस चुनाव में कितना मजबूत है भाजपा?
-पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा कैडर बेस पार्टी है। टिकट बेचकर चुनाव लड़ने वाली पार्टी नहीं है। पिछले चुनाव में आप के समर्थन में विदेशों से भी वॉलिंटियर पहुंचे थे, लेकिन पांच साल की सत्ता में झूठ बोलने की वजह से अब उनके पास वॉलिंटियर नहीं हैं। हरियाणा व पंजाब से रुपये लेकर वॉलिंटियर दिल्ली आए हैं।

लड़ाई किस पार्टी से है? कांग्रेस या आप से?
-आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनाव में जमानत तक नहीं बचा सकी। कांग्रेस पार्टी दूसरे नंबर पर रही। भाजपा की लड़ाई दोनों में से किसी से नहीं है। भाजपा 45 से 50 सीट पर परचम लहराएगी और दिल्ली में सरकार बनाएगी।

प्रत्याशी के चयन में देरी क्यों?
-सभी 70 सीट के लिए प्रत्याशियों की सूची फाइनल है। पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक का इंतजार है। बैठक में एक घंटे में ही सूची फाइनल कर ली जाएगी। यह भी आकलन कर रहे हैं कि अन्य राजनीतिक पार्टियां चुनाव के लिए किस रणनीति के तहत प्रत्याशी उतार रही है।

सीएए के खिलाफ छात्र सड़क पर हैं। भाजपा इस कानून पर अटल है?
-कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्र नहीं हैं। ये आप, कांग्रेस और वामपंथी पार्टी के एक्टिविस्ट हैं, जो बाहर से बुलाए गए हैं और एजेंडे पर काम करते हैं।

क्या इस बार प्रदेश में मुख्यमंत्री के चेहरे की कमी है?
-कमल का फूल ही हमारा चेहरा है। हरियाणा व महाराष्ट्र का चुनाव भी भाजपा ने बिना मुख्यमंत्री के चेहरे पेशकर लड़ा और जीता भी। बूथ कार्यकर्ता हमारी ताकत है।

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