हुडा के मास्टर प्लान में बिल्डरों के सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) मामले की जांच के लिए गठित जस्टिस एसएन ढींगरा आयोग के बुलाने के बावजूद शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पेश नहीं हुए।
पूर्व सीएम की ओर से सिविल लाइन्स स्थित आयोग कार्यालय में तीन वकीलों के पैनल ने हुड्डा को बुलाए जाने का कारण पूछा। जिस पर आयोग ने कहा कि हुड्डा के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है।
जांच प्रक्रिया के तहत उन्हें बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया था। इस दौरान सुरक्षा को लेकर भारी पुलिस बल वाटर कैनन और वज्र वाहन के साथ मौजूद रहा।
हुडा के मास्टर प्लान में सेक्टर 76 से लेकर 83 तक में हुए सीएलयू की जांच के लिए प्रदेश सरकार ने जस्टिस ढींगरा आयोग का गठन किया है। इसी के अंतर्गत आने वाले शिकोहपुर गांव में सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने जमीन खरीदी थी।
उसे भी सीएलयू दिया गया था। जिसे बाद में उन्होंने डीएलएफ को बेच दिया। इसे ही वाड्रा-डीएलएफ लैंड डील कहते हैं। आईएएस अशोक खेमका ने इस लैंड डील में घोटाला उजागर किया था।
शिकोहपुर, सिंकदरपुर बढा, सीही और खेडकीदौला गांव की जमीन पर बने इन सेक्टरों में दिए गए सीएलयू और जमीनों के लाइसेंस के मामले में गवाही के लिए आयोग ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को इसलिए बुलाया था क्योंकि मुख्यमंत्री रहते हुए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट उन्हीं के पास था।
पूर्व सीएम हुड्डा पर राजनैतिक तौर पर यह आरोप लगता रहता है कि उन्होंने वाड्रा को सस्ती जमीन और उस पर सीएलयू दिलवाकर लाभ पहुंचाया है। आयोग ने 18 मार्च को उन्हें नोटिस जारी किया था।
ड्डा की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के एक पैनल ने एडवोकेट नरेंद्र हुड्डा के नेतृत्व में आयोग से मुलाकात की। वकीलों ने पूर्व मुख्यमंत्री पर लगे आरोप को जानने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि यदि कोई शिकायत है तो उसकी प्रति दी जाए। जिस पर आयोग ने कहा कि पूर्व सीएम के खिलाफ अभी तक शिकायत नहीं है। साथ ही यह भी बताया कि हुड्डा को पेश होने के लिए कोई और तारीख नहीं दी गई है। आयोग की जांच जारी रहेगी।