भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद
- फोटो : ANI
नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण जेल गए भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को गुरुवार शाम जेल से रिहा कर दिया। उन्हें दिल्ली की जामा मस्जिद से गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया था। दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को उन्हें सशर्त जमानत दी थी। वहीं, अदालत ने चंद्रशेखर को चार सप्ताह के लिए दिल्ली आने और 16 फरवरी तक किसी भी प्रदर्शन में शामिल होने पर रोक लगा दी है।
जेल से रिहा होने के बाद आजाद ने कहा कि शुक्रवार को एक बजे मैं जामा मस्जिद जाऊंगा। साथ ही मैं रामदास मंदिर, गुरुद्वारा और चर्च भी जाऊंगा।
उन्होंने कहा कि हमारा आंदोलन संवैधानिक रूप से जारी रहेगा। जब तक यह कानून वापस नहीं लिया जाता। जो लोग मुल्क को बताना चाहते हैं कि हम उनके खिलाफ हैं।
बुधवार को अदालत ने सीएए विरोध में गिरफ्तार भीम आर्मी चीफ चंद्रेशखर आजाद को जमानत प्रदान करते हुए रविंद्रनाथ टैगोर की कविता 'वेहर दि माइंड इस विदाउट फियर' की पंक्तियां पढ़ते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का मौलिक अधिकार सरकार अपने नागरिकों से नहीं छीन सकती।
इससे पहले दिल्ली मे भीम आर्मी स्टूडेंट्स फेडरेशन के कार्यकर्ता चंद्रशेखर आजाद की रिहाई को लेकर सड़क पर उतर आए थे। जहां उन्होंने धरना प्रदर्शन किया। छात्रों ने कहा कि पुलिस चंद्रशेखर को जल्द से जल्द रिहा करे।
बता दें कि पुलिस ने जामा मस्जिद से भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर को हिरासत में ले लिया था। बाद में पुलिस ने चंद्रशेखर पर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने, लोगों को उकसाने और दंगा भड़काने समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर उसे शनिवार दोपहर गिरफ्तार कर लिया। चंद्रशेखर के अलावा पुलिस ने हिंसा फैलाने के आरोप में 15 लोगों को गिरफ्तार किया था।
इससे पहले दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर पुलिस को चकमा देकर वहां से भागने में कामयाब रहा था। लेकिन शाम में एक बार फिर चंद्रशेखर जामा मस्जिद में मौजूद अपने समर्थकों के बीच पहुंच गया और नारेबाजी शुरू कर दी। वहां उन्होंने कहा था कि जब तक यह काला कानून वापस नहीं लिया जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा।