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दिल्ली में 'बदलापुर', कत्लेआम का खुलासा

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इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक भरत सिंह हत्याकांड की गुत्थी को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने सुलझा लिया है।
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पुलिस ने इस संबंध में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान दिचाऊं कलां गांव निवासी उदयवीर उर्फ काले (40), नजफगढ़ निवासी प्रधान सुनील (25), झुंझनू राजस्थान निवासी पहलवान सूबे (23), गांव सिसाना, खरखौदा, सोनीपत निवासी मोहित नागर उर्फ मोनू उर्फ चांद (21) और नाहन, हिमाचल प्रदेश निवासी रमन गुरांग (43) के रूप में हुई है।

अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि रमन पंजाब पुलिस का पूर्व एएसआई है। फिलहाल वह उदयवीर का निजी पीएसओ है। वहीं, सुनील, सूबे व मोहित शार्प शूटर हैं। हेमंत ने हथियारों का इंतजाम किया। हेमंत को पता था कि 29 मार्च को भरत सिंह अभिनंदन वाटिका में एक कार्यक्रम में जाएगा। उदयवीर व हेमंत समेत अन्य ने हत्या का प्लान बनाया। पहले बाइक से नितिन व मोनू को वाटिका में भेजा गया।
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इनका इशारा मिलते ही हेमंत, रवि उर्फ चूजा, प्रधान सुनील, पहलवान सूबे और देवा वाटिका में दाखिल हुए। अंदर पहुंचते ही इन्होंने नितिन व मोनू के साथ मिलकर भरत पर गोलियां चला दीं। भरत की ओर से चली गोलियों में हेमंत, प्रधान सुनील, रवि चूजा, देवा और कानपुर निवासी रवि जख्मी हो गए। घायल होने के बाद भी सभी भागने में कामयाब हो गए। वहीं, हमले में भरत समेत पांच लोग जख्मी हुए थे, जिसमें भरत सिंह की मौत हो गई।

दो दशक से चली आ रही गैंगवार ही बनी हत्या का कारण

बाहरी दिल्ली में दो दशकों से भी ज्यादा समय से चली आ रही गैंगवार की वजह से भरत सिंह की हत्या की गई। 90 के दशक में कृष्ण पहलवान व अनूप-बलराज गैंग के बीच गैंगवार चल रही थी। इसी गैंगवार में वर्ष 2002 में उदयवीर उर्फ काले के पिता सूरजमल व उसके भाई सुखबीर समेत तीन लोगों की हत्या कर दी गई थी। सुखबीर की हत्या के समय उसका बेटा हेमंत सिर्फ नौ साल का था। इधर धीरे-धीरे कृष्ण पहलवान के गैंग ने अनूप गैंग के ज्यादातर लोगों की हत्या कर दी। तभी से उदयवीर व हेमंत कृष्ण पहलवान व भरत से बदला लेना चाहते थे। पुलिस की मानें तो इस गैंगवार में अब तक करीब तीन दर्जन लोग भेंट चढ़ चुके हैं।

धीर-धीरे अपनी शक्ति जुटाने के बाद 2012 में उदयवीर ने झड़ौदाकलां निवासी विक्की और कुलदीप नामक बदमाशों से हाथ मिलाया। भरत सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान विक्की और कुलदीप की बुआ को थप्पड़ मार दिया था। दोनों उदयवीर के साथ मिलकर भरत से बदला लेना चाहते थे। जून 2012 में विक्की, कुलदीप, सतीश, विरेंद्र उर्फ भोलू, नवीन, रविंद्र उर्फ मोनू, राजेंद्र और पद्म डागर ने भरत सिंह पर जानलेवा हमला किया भी था। लेकिन कई गोलियां लगने के बाद वह बच गया था। इस हमले के ज्यादातर आरोपी जेल में बंद हैं।

इधर, हेमंत हर हाल में अपने पिता की हत्या का बदला लेना चाहता था। उदयवीर ने हेमंत से भरत की हत्या का इंतजाम करने के लिए कहा। उदयवीर व हेमंत ने मिलकर नए लड़कों का इंतजाम किया। घटना को अंजाम देने के लिए हथियारों का इंतजाम करने के बाद हेमंत ने अपने रिश्तेदार अमित की स्कॉर्पियो गाड़ी का इंतजाम किया। घटना वाले दिन नितिन और मोनू पहले बाइक से पहुंचे। बाकी सभी आरोपी अनाज मंडी नजफगढ़ के पास इकट्ठा हो गए। उदयवीर घर पर ही मौजूद रहा। नितिन व मोनू का इशारा मिलते ही हेमंत व उसके साथियों ने वारदात को अंजाम दिया। बाद में सभी फरार हो गए। वारदात में उदयवीर व हेमंत का नाम आने के बाद अब गैंगवार की आशंका बढ़ गई है।

वर्ष 2009 में उदयवीर ने दिचाऊं कलां में तीन लोगों से तीन एकड़ सरकारी जमीन खरीदी थी। भरत अच्छी तरह से जानता था कि जमीन को तीन लोग न तो किसी को बेच सकते हैं और न ही इसे कोई खरीद सकता है। भरत ने जमीन बेचने वाले एक शख्स को उकसाकर उदयवीर के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया था। इस बात से उदयवीर व भरत के खिलाफ रंजिश और बढ़ गई थी।

रविंद्र यादव ने बताया कि 2008 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भरत ने उदयवीर से अपने लिए सपोर्ट मांगा था। लेकिन उदयवीर ने समर्थन देने से इनकार कर दिया था। इसके अलावा उसने भरत के विरोधी को सपोर्ट कर दिया था। इस बात पर भी दोनों के बीच रंजिश बढ़ी। धीर-धीरे बढ़ी रंजिश गांव में किसी न किसी छोटे-मोटे विवाद की वजह भी बनने लगी।

पीटने का बदला लेने के लिए हत्या में शामिल हुआ सूबे

पिटाई का बदला लेने के लिए उदयवीर का ड्राइवर सूबे हत्याकांड में शामिल हुआ। इस बात खुलासा सूबे ने पुलिस के सामने किया है। सूबे ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2012 में भरत सिंह के हमला के मामले में उदयवीर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। जेल में रहने के दौरान सूबे अक्सर उदयवीर की पत्नी को उदयवीर से मिलवाने के लिए जेल ले जाता था। इस बात से पूर्र्व विधायक उससे नाराज था। सूबे के मुताबिक एक दिन भरत सिंह ने उसे रोक लिया और उदयवीर की तरफदारी करने की बात कहकर उसकी पिटाई कर दी। उसके बाद से ही उसने भरत सिंह से बदला लेने की ठान ली और जेल से निकलने के बाद उसने उदयवीर को हत्याकांड में शामिल होेने की बात कही।

पुलिस जब भरत के हत्यारों को मीडिया के सामने पेश कर रही थी। इस दौरान उदयवीर और अन्य आरोपियों के परिवार की महिला सदस्य भी वहां मौजूद थीं। तीनों महिलाएं मीडिया से बात नहीं कर रही थीं। महिलाएं एक नजर अपने परिवार के सदस्यों को देखना चाहती थी। जैसे ही पुलिस उन लोगों को मीडिया के सामने पेश कर वापस लेकर गई, तीनों वहां से चली गईं।

भरत सिंह की हत्या के बाद सभी आरोपी गुड़गांव गए जहां इलाज के बाद सभी रेवाड़ी, लुहान और राजस्थान के अलावा दिल्ली में ठिकाने की तलाश में घूमते रहे। उन्हें इस बात का भी डर था कि कृष्ण पहलवान के लोग उसे देख न लें। बताया जा रहा है कि वह अलीपुर में किसी बदमाश की मदद से ठिकाने की तलाश में थे।

पुलिस की लापरवाही से हुई हत्या

वर्ष 2012 में पूर्व विधायक भरत सिंह पर हुए कातिलाना हमला के बाद अगर पुलिस सक्रिय होती तो संभव था कि भरत सिंह की जान बच सकती थी। हमले के साजिशकर्ता के रूप में पुलिस ने उदयवीर को गिरफ्तार किया था। उसके बाद ही फिर से भरत की हत्या की साजिश रची जाने लगी। वर्ष 2013 में उदयवीर के भतीजे हेमंत को स्पेशल सेल ने हथियार खरीदते हुए पकड़ा था। पुलिस पूछताछ में हेमंत ने कबूल भी किया था कि हथियार भरत की हत्या के लिए खरीद रहा था।

हेमंत के जेल से छूटने के बाद पुलिस ने उस पर नजर नहीं रखी और परिणाम यह हुआ कि हेमंत ने चाचा उदयवीर के साथ मिलकर 29 मार्च की रात भरत सिंह की हत्या कर दी। पुलिस की सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि जिस हेमंत को पुलिस ने हथियार खरीदते हुए गिरफ्तार किया था, वह फिर से हथियार तस्करों के संपर्क में था और हत्या करने के लिए भारी संख्या में हथियार की खरीददारी की।

हथियार के लिए उसने मुजफ्फर नगर निवासी धीरेंद्र से संपर्क किया। धीरेंद्र ने हथियार के लिए मुंगेर निवासी मेहराज आलम और मकसूद से संपर्क किया। लेकिन इस तस्करी की खबर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में तैनात पुलिसकर्मियों को लग गई। पुलिस कर्मियों ने हथियार की खेप लेकर आए तीनों तस्करों को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से पुलिस को .9 एमएम की दो और 0.32 बोर की 8 पिस्टल व चार कारतूस मिले थे।
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हत्या में पूर्व विधायक का बेटा भी शामिल

हत्या के मामले में एक पूर्व विधायक के बेटे के भी शामिल होने की बात सामने आ रही है। मामले में एक आरोपी नितिन अभी फरार है। पुलिस की मानें तो नितिन एक पूर्व विधायक का बेटा है। वह उदयवीर के भतीजे हेमंत का दोस्त है। नितिन ने साजिश रचने में हेमंत व उदयरवीर की मदद की थी। साथ ही वारदात के वक्त मौजूद था।

अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि वर्ष 2002 में भरत के भाई कृष्ण पहलवान व उसके साथियों ने उदयवीर के पिता सूरजमल, भाई सुखबीर और अंकल नारायण सिंह की सोनीपत में हत्या कर दी थी। उसी का बदला लेने के लिए उदयवीर ने अपने भतीजे हेमंत (सुखबीर के बेटा) के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया।

पुलिस ने आरोपियों के पास से एक 9 एमएम कार्बाइन, दो पिस्टल, चार मैगजीन व 20 कारतूस बरामद किए हैं। उन्होंने बताया कि टीम को शनिवार शाम को मिली सूचना के बाद अलीपुर के सिरसपुर के पास उदयवीर, प्रधान सुनील व पहलवान सूबे को दबोच लिया। इनसे पूछताछ के बाद मोनू उर्फ चांद को हथियारों के साथ पूठखुर्द बवाना से गिरफ्तार किया। बाद में रमन को भी दिल्ली से दबोचा गया।
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