अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। स्मार्टफोन और डिजिटल स्क्रीन के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों व युवाओं में घटती पढ़ने की आदत को फिर से जीवंत करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। सीआरसी ग्रुप ने समाज में पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जॉय ऑफ रीडिंग नामक वैश्विक सीएसआर अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान में कार्यशाला और अलग-अलग शहरों में लाइब्रेरी स्थापित की जाएंगी।
इस अभियान का औपचारिक उद्घाटन अभिनेत्री, लेखिका व सामाजिक कार्यकर्ता गुल पनाग, सीआरसी ग्रुप के संस्थापक एवं सीईओ कुणाल भल्ला, निदेशक सलिल कुमार और प्रमुख शिक्षाविदों की उपस्थिति में हुआ। सीआरसी ग्रुप के निदेशक सलिल कुमार ने कहा कि आज इंटरनेट और स्क्रीन टाइम बढ़ने से किताबों से जुड़ाव कम हो गया है। वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि गहन पढ़ाई (डीप रीडिंग) और हाथ से लिखने से न्यूरो सिस्टम सक्रिय होता है, जो सोचने व सीखने की क्षमता बढ़ाता है। सीईओ कुणाल भल्ला ने कहा कि वास्तविक विकास केवल इमारतें बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में ज्ञान और जिज्ञासा बढ़ाना भी जरूरी है।
अभियान के पहले चरण में नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, अहमदाबाद, लखनऊ, गोरखपुर, इंदौर, हैदराबाद के साथ दुबई, सिंगापुर, लंदन, न्यूयॉर्क, इटली और मॉस्को में कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इनमें विख्यात लेखक, प्रकाशक, विश्वविद्यालय के कुलपति और प्राचार्य और स्कूल प्रधानाचार्य शामिल होंगे। संस्था का मानना है कि यह पहल आने वाले समय में बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप लेगी और नई पीढ़ी को किताबों से दोबारा जोड़ेगी।