देशभर के प्रमुख मेट्रो शहरों में वायु प्रदूषण के साथ ध्वनि प्रदूषण की समस्या भी विकराल रूप लेती जा रही है। वायु प्रदूषण की तरह ध्वनि प्रदूषण को भी साइलेंट किलर माना जा रहा है।
अत्यधिक शोर के चलते न सिर्फ लोगों के व्यवहार में परिवर्तन हो रहा हैं बल्कि हाईपरटेंशन, चिड़चिड़ापन व अवसाद जैसी समस्याएं भी जन्म ले रही हैं। इसे देखते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने दिल्ली व लखनऊ समेत देश के प्रमुख 9 शहरों को ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण करने का आदेश दिया है।
इनमें हैदराबाद, कोलकाता, बंग्लुरू, मुंबई, नवी मुंबई और चेन्नई भी शामिल हैं। सीपीसीबी ने सभी शहरों के ट्रैफिक विभाग के आला अधिकारियों से कहा है कि वे ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 6 मार्च से पहले कार्ययोजना तैयार कर उस पर अमल करें। इसके अलावा स्थिति रिपोर्ट भी सीपीसीबी को सौंपे।
सीपीसीबी ने 2015 की अपनी रिपोर्ट में बताया था कि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ, बंग्लुरू और हैदराबाद के कुल 70 लोकेशन पर ध्वनि प्रदूषण पाया गया। इन शहरों में रीयल टाइम ध्वनि तरंगों की रिकॉर्डिंग की जा रही है।
6 मार्च तक इन आदेशों पर करना होगा अमल-
musical horn
- फोटो : सोशल मीडिया
इन सात शहरों का चुनाव रीयल टाइम नेशनल एंबियंट नॉयज मॉनिटरिंग नेटवर्क, 2011 के तहत पायलट योजना के तहत किया गया था। वहीं 2011 से 2014 तक इन सात शहरों में 35 स्थानों पर लगे ध्वनि निगरानी संयंत्रों के आंकड़ों के आधार पर सीपीसीबी ने 26 अप्रैल, 2016 को सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश भी दिया था। अब इन सात शहरों में दो और शहर जुड़ चुके हैं।
6 मार्च तक इन आदेशों पर करना होगा अमल-
-सीपीसीबी ने संबंधित शहरों को कहा है कि वे सुनिश्चित करें कि शांति क्षेत्रों में वाहन चालक अनावश्यक और लगातार हॉर्न न बजाए।
-म्यूजिकल हॉर्न वाले वाहनों को नहीं होगी अनुमति। बस, ट्रक, कार को पावर प्रेशर और म्यूजिकल हॉर्न लगाने पर मनाही। यदि म्यूजिकल या मल्टी टोन हॉर्न वाहन में फिट मिले तो तत्काल चालान कर हॉर्न जब्त कर लिया जाए।
-स्कूलों में जन-जागरुकता कार्यक्रम चलाकर पटाखों से पर्यावरण और सेहत को होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी जाए।
-रात्रि 10 बजे के बाद शादी-ब्याह में बजने वाले बाजे, जन कार्यक्रम में लाउड-स्पीकर, जनरेटर के चलने पर मनाही। इससे पहले तय ध्वनि मानकों पर ही चलाने की अनुमति दी जाए।
-आवासीय कॉलोनियों में औद्योगिक गतिविधि से होने वाले शोर को खत्म किया जाए।
-लोगों की शिकायतों के लिए कंट्रोल रूम बनाने और तय समय में कार्रवाई की जाए।
सीपीसीबी के मुताबिक ध्वनि मानक
musical horn
- फोटो : सोशल मीडिया
स्थान दिन रात
औद्योगिक इलाका - 75 70
व्यावसायिक इलाका - 65 55
आवासीय इलाका - 55 45
शांति क्षेत्र - 50 40
नोट- सभी आंकड़े डेसीबल में हैं। सभी क्षेत्रों में ध्वनि का मानक दिन का समय सुबह 6 बजे से 10 बजे और रात का समय 10 बजे से सुबह 6 बजे तक तय किया गया है।