भविष्य में आ सकता है एआई
डॉ. टंडन ने कहा कि मौजूदा सॉफ्टवेयर पहले से फीड डेटा के आधार पर सुझाव देता है। आने वाले दिनों में इस सॉफ्टवेयर को एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) बेस बनाया जा सकता है। इसे लेकर दूसरे जगहों पर काम हो रहे हैं। एआई आधारित तकनीक विकसित होने पर मधुमेह मरीजों का प्रबंधन और बेहतर हो जाएगा। यह विश्लेषण के साथ तकनीकी सुझाव भी दे सकेगी।
देशभर में मददगार होगी तकनीक
डॉ. टंडन ने कहा कि सरकार देशभर के लोगों का इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार कर रही है। इस तकनीक की मदद से पूरे देश में मधुमेह के अलावा उच्च रक्तचाप व कोलेस्ट्रॉल का प्रबंधन आसान हो जाएगा। इन मरीजों पर नजर रहेगी। इसकी मदद से मरीजों में होने वाली दिक्कत व उनके देखभाल को लेकर भी बेहतर व्यवस्था की जा सकेगी। ऐसा करने से देश के स्वास्थ्य सुविधाओं पर मरीजों का बोझ कम होगा। मधुमेह, उच्च रक्तचाप सहित दूसरे विकारों के इलाज के लिए देश में पर्याप्त डॉक्टर नहीं है। डॉक्टरों के अभाव में सभी मरीजों को उपयुक्त इलाज नहीं मिल पाता।
सॉफ्टवेयर में यह किया गया अपडेट
- मरीज की क्या दवा चल ही है।
- दवा की डोज की मात्रा क्या है।
- खाने के बाद उसे क्या दिक्कत हो रही है।
- शरीर में कोई एलर्जी या रिएक्शन हुआ।
देश में तेजी से बढ़ रहा है मधुमेह
देश में मधुमेह का रोग तेजी से बढ़ रहा है। अस्पताल आ रहे मरीजों में युवाओं की संख्या भी बढ़ रही है। इस अध्ययन में कहा गया है कि दक्षिण एशिया में सात में से एक मौत मधुमेह के कारण होती है।