इसीलिए एयरपोर्ट अथॉरिटी शुरूआत में सिर्फ तीन साल के लिए जमीन लीज पर ले रही है। हालांकि जमीन लीज को लेकर उपजे विवाद के बीच किसानों ने कई दफा मांग रखी थी कि उनकी जमीन का अधिग्रहण कर लिया जाए लेकिन अथॉरिटी सीधे तौर पर जमीन लीज पर लेने पर अड़ी रही।
इसके साथ ही जमीन लीज को लेकर दो प्रारूप बनाए गए हैं। सिकंदरपुर गांव में बनाने वाले टर्र्मिनल तक जाने वाली जमीन राज्य सरकार की तरफ से लोक निर्माण विभाग लीज पर लेगा। जबकि टर्मिनल हेतु जमीन एयरपोर्ट अथॉरिटी के पक्ष में लीज पर ली जाएगी।
यानी सीधे तौर पर राज्य व केंद्र की सरकार अपना पैसा लगाकर उड़ान सेवा शुरू कराएगी। इस नजरिए से भी समझा जा रहा है कि हिंडन एयरबेस से घरेलू उड़ान सेवा एक निश्चित अवधि तक के लिए हो सकती है।
मौजूदा वक्त के हिसाब से हिंडन एयरबेस से घरेलू उड़ान सेवा शुरू होने में दो से तीन महीने के वक्त लग सकता है। युद्ध स्तर पर काम होने की स्थिति में ही तीन महीने के अंदर टर्मिनल बन पाएगा।
उसके बाद उड़ान सेवा शुरू होने पर दिल्ली एयरपोर्ट का दबाव कम होगा। निजी विमानन कंपनियां बीते वर्ष नवंबर में ही हिंडन से 18 रूटों पर घरेलू उड़ान सेवा शुरू करने इच्छा जता चुकी थी, जिसके बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी ने आगे की कवायद शुरू की है।