बल्लभगढ़ में त्योहार के मद्देनजर शनिवार को बसों में खासी भीड़भाड़ रही। यात्रियों का दबाव बढने पर रोडवेज को अतिरिक्त बसों का संचालन व्यस्त रूटों पर करना पड़ा। व्यवस्था नाकाफी होने के चलते यात्री प्राइवेट बसों और अन्य वाहनों में सफर करने को मजबूर हुए।
वहीं, घर जाने की जल्दी ने सड़कों पर जाम की समस्या को बढ़ा दिया। हाईवे पर दिनभर ट्रैफिक की रफ्तार मंद रही। ट्रैफिक पुलिसकर्मी जाम से निपटने में दिनभर मशक्कत करते रहे।
रोजगार के सिलसिले में अलग-अलग जगह से औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में आए लोग त्योहार आने पर घर लौट रहे हैं।
यात्रियों की भीड़ का असर ट्रेनों के अलावा बसों पर भी दिख रहा है। हालांकि, हरियाणा रोडवेज के फरीदाबाद डिपो की तरफ से अतिरिक्त बसों का संचालन करने की योजना बनाई गई थी। लगातार चार दिन की छुट्टी होने के चलते शनिवार सुबह से ही बस अड्डों पर यात्रियों की भीड़ देखी गई।
दिल्ली, मथुरा, आगरा, अलीगढ़, गुडग़ांव, भरतपुर, मेरठ को जाने वाली बसें पूरी तरह से पैक होकर जा रही है। अलीगढ़ रूट पर चल रहे परमिट विवाद का असर शनिवार को भी दिखा। इस रूट पर हरियाणा रोडवेज की बसों का संचालन नहीं हुआ। यूपी रोडवेज की बसें कम नजर आईं। यात्रियों ने प्राइवेट बसों में ज्यादा किराया चुकाकर सफर किया। रोडवेज की बसों में भीड़ इतनी थी कि अंदर पैर रखने के लिए भी जगह नहीं थी।
सुबह करीब 9 से दोपहर 3 बजे तक अफरातफरी का माहौल रहा। बड़ी बात यह रही कि अधिकांश बसों पर सूचना पट्टिका नहीं लगी हुई थी। इससे पता नहीं लग पा रहा था कि कौन सी बस कहां जाएगी। दिन चढ़ते-चढ़ते यह बात साबित भी हो गई। दिल्ली, चंडीगढ़, गुडग़ांव, मेरठ, सोहना व मथुरा जाने वाली बसों में पांव रखने के लिए भी जगह नहीं मिली। मथुरा जाने वाली महिला नीरज व हर्षिता ने बताया कि अतिरिक्त बसें चलने के बाद भी बसों में अफरा-तफरी का माहौल दिनभर रहा। मेघा सिंगला के अनुसार बसों में भीड़ देखकर लोगों ने निजी बसों व ऑटो का सहारा लिया। ऐसे में निजी वाहन चालकों ने मनमाना किराया वसूला। हरियाणा रोडवेज की सिटी ेबसों व डीटीसी सहित अन्य राज्यों की बसों में भी भारी भीड़ रही।
चालक-परिचालक की कमी से यात्री परेशान
रोडवेज के अधिकारी भले ही बसों का फेरा बढ़ाने की बात करते हैं। मगर हकीकत यह है कि जब तक चालक-परिचालक की कमी पूरी नहीं होगी तब तक यात्रियों की दिक्कतें खत्म नहीं होगी। क्योंकि सरकार की ओर से रोडवेज को बसें तो दे दी गईंए पर बसों के संचालन के लिए ड्राइवर और कंडक्टर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।