आनंद पर्बत की पंजाबी बस्ती जहां दिल्ली की मीनाक्षी रहा करती थी और जहां उसका बेरहमी कत्ल कर दिया गया, वहां युवा होती लड़कियों के लिए कोई जगह नहीं है।
इस इलाके में माता-पिता अपनी लड़कियों की शादी जितनी जल्दी से जल्दी हो सके कर देते हैं। यहां ऐसी किसी लड़की को ढूंढना काफी मुश्किल है जिसने 12वीं के बाद भी पढ़ाई की हो। मीनाक्षी के हालातों ने उसे इस इलाके में अपवाद बना दिया था।
वो 19 साल की थी पर ना तो वो ना उसके मां-बाप उसकी शादी के बारे में सोच रहे थे। मां को टीबी की बीमारी होने पर और पिता को गले में ट्यूमर हो जाने के बाद 11वीं छात्रा मीनाक्षी अपने परिवार की एकलौती कमाउ सदस्य बन गई थी।
मीनाक्षी तेज थी, अपने करियर को लेकर सजग थी और उसका रहन-सहन भी फैशन के अनुरूप था। उसकी यही बहादुरी और रहन सहन उसके पड़ोसियों की आंखों में खटकने लगी थी।
बेटी नहीं घर का बेटा थी मीनाक्षी
आखिरकार पिछले बृहस्पतिवार को उसे अपने बहादुरी और सबसे अलग होने की कीमत चुकानी पड़ी। एक हफ्ते पहले मीनाक्षी को 21 साल के एक युवक जयप्रकाश ने भरे बाजार में 35 बार चाकू घोंप कर उसकी हत्या कर दी।
उसका शोषण किया गया और अंत में उसकी हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई क्योंकि वो इलाके की अन्य लड़कियों की तरह नहीं थी और अपने कंधों पर अपना परिवार चला रही थी।
मीनाक्षी की बड़ी बहन 23 साल की हिना जिसकी शादी हो चुकी है कहती है कि मीनाक्षी उसकी बहन, भाई, दोस्त सबकुछ थी। हिना ने बताया कि उनके भाई नहीं था इसलिए मीनाक्षी ही पढ़ाई करते हुए उनका परिवार चला रही थी।
हिना बताती है मीनाक्षी पढ़ने में बहुत अच्छी थी लेकिन जब उनके माता-पिता दोनों बुरी तरह बीमार पड़ गए तो उसने पढ़ाई छोड़ दी और काम करने लगी।
मीनाक्षी की बस्ती में ज्यादा पढ़ी लड़कियों को चरित्रहीन मानते हैं
मीनाक्षी ने 11वीं तक की पढ़ाई पास के ही सरकारी स्कूल में की थी। हिना ने बताया कि इन दिनों मीनाक्षी और परिवार के अन्य लोग काफी खुश थे क्योंकि हाल ही में मीनाक्षी ने डीटीसी के बस कंडक्टर की जॉब के लिए परीक्षा पास की थी।
मीनाक्षी की मौत से बेहद दुखी हिना ने कहा कि मीनाक्षी को जॉब मिल भई जाती लेकिन उसके और उसके मां-बाप के सारे सपने उसकी मौत ने बिखेर दिए। छोटी होने के बावजूद हिना मीनाक्षी से अपनी सारी परेशानियां बांटती थी।
दोनों बहने आखिरी बार 14 जुलाई को मिली थीं जब मीनाक्षी हिना के ससुराल गई थी। जहां मीनाक्षी की मौत से पूरा देश सोचने पर मजबूर है कि ऐसी घटनाएं आज के समय में भी देश में क्यों हो रही हैं। वहीं आनंद पर्बत की इस बस्ती के ज्यादातर लोगों का मानना है कि मीनाक्षी के साथ जो हुआ उसका कारण वो खुद ही है।
दबी जुबान में ही सही पर कुछ लोग तो ये भी कह रहे हैं कि मीनाक्षी की हत्या को जरूरत से ज्यादा तूल दिया जा रहा है। इस बस्ती में जहां मीनाक्षी रहती थी वहां लड़कियों के लिए 10वीं के बाद पढाई को किसी अपराध से कम नहीं माना जाता। अगर कोई लड़की नौकरी करने लगे तो उसे तो चालू(ढीला कैरेक्टर) नाम ही दे दिया जाता है।
'मीनाक्षी की मौत पर सब अपनी-अपनी रोटी सेंक रहे हैं'
रीना नाम की एक लड़की जो इग्नू से एमए कर रही है का कहना है कि आनंद पर्बत की इस बस्ती में लड़कियां अगर घर से बाहर कदम रखती हैं तो उन्हें उलाहना, भद्दे व अश्लील कमेंट्स और शारिरीक शोषण से भी गुजरना पड़ सकता है।
मीनाक्षी की मौत पर राजनीतिक दलों द्वारा की जा रही राजनीति नाराज और दुखी हिना कहती है कि किसी भी तरह का मुआवजा उसकी बहन नहीं लौटा सकता।
उसने कहा कि आम आदमी पार्टी समेत सभी राजनीतिक दल उसकी बहन के न्याय के लिए नहीं बल्कि अपने फायदे के लिए उसकी मौत का मुद्दा उठा रहे हैं। हिना का कहना है कि अगर नेता लोग बलात्कारियों और हत्यारों को सजा दिलाने के लिए इतने प्रतिबद्ध होते तो आज निर्भया के हत्यारे जिंदा नहीं होते।
(खबर व फोटो साभारः टाइम्स ऑफ इंडिया)