साइबरसिटी में महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए पिछले साल फिर से लांच किए गए पिंक ऑटो बेपटरी हो गए है। ट्रैफिक पुलिस की ढील और ऑटोचालकों के लालच के चलते केवल महिला यात्रियों के लिए शुरू किए ऑटो में पुरुष यात्री भी सफर कर रहे है नतीजा, सुरक्षा के डर से अब महिला यात्री भी इनमें सफर करने से कतराने लगी है।
16 दिसंबर 2013 को राजधानी दिल्ली में हुए निर्भया कांड के बाद महिला यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर गुड़गांव ट्रैफिक पुलिस ने पिंक ऑटो की शुरूआत की थी। लेकिन ट्रैफिक पुलिस की अनदेखी के चलते कुछ ही दिनों में पिंक ऑटो सड़कों से गायब हो गया था।
निर्भया कांड के दो साल पूरे होने के बाद गुड़गांव पुलिस ने शहर की महिलाओं की जिम्मेदारी का अहसास करते हुए हुडा सिटी सेंटर और इफको चौक पर पिंक ऑटो में कुछ एडवांस तब्दीली के साथ इन्हें फिर से लांच किया गया था। ऑटो में हूटर के अलावा यात्री सीट के पास इमरजेंसी (पैनिक) बटन लगाया गया जिसमें आपात्तकालीन स्थिति में बटन दबाने पर इसकी सूचना तुरंत पुलिस को मिल जाती।
पिंक ऑटो की रिलांचिंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस के आला अधिकारियों ने पिंक ऑटो में पुरुष यात्रियों के सफर के लिए साफ मनाही कर दी जिसमें यह भी कहा गया था कि पिंक ऑटो पर निगरानी रखने के लिए ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को भी विशेष दिशानिर्देश जारी किए गए है।
ऑटो की जांच में अगर अकेले में पुरुष यात्री सफर करते पाए गए तो ऑटो का चालान किया जाएगा। लेकिन पांच महीने में पिंक ऑटो पर ट्रैफिक पुलिस की तरफ से ध्यान नहीं दिए जाने से ये ऑटो फिर से बेपटरी हो गए है। ट्रैफिक पुलिस की तरफ से बरती जा रही ढील का नतीजा है कि ऑटोचालक पुरुष सवारियों को बैठा रहे है। इसे देखते हुए महिला यात्रियों की दिलचस्पी नहीं उठा रही।