महानगर में अर्थ आवर डे बयानबाजी से आगे नहीं बढ़ सका। जनता से बिजली बचाने और एक घंटे का ब्लैकआउट करने का आहवान करने वाले अफसरों के बंगले दूधिया रोशनी में नहाते रहे।
अफसरों ने अर्थ आवर डे पर ध्यान तक नहीं दिया। पर्यावरण विद और सामाजिक संगठन इसके लिए लगातार अभियान चला रहे थे, लेकिन सब कुछ नाकाफी होकर रह गया।
अमर उजाला ने शनिवार रात अर्थ आवर डे के टाइम 8:30 से 9:30 तक प्रमुख अधिकारियों के आवासों पर जाकर देखा-
नगर आयुक्त आवास- समय रात 8:50 बजे।
अंदर बाहर की लाइटों के साथ ही गैलरी-साइडवाल पर भी बल्व जगमगा रहे थे। लाइट बंद करना तो दूर, इनकी संख्या को कम भी नहीं किया गया था। यानि यहां पर जरूरत से ज्यादा बिजली धड़ल्ले से प्रयोग की जा रही थी।
जीडीए वीसी आवास- समय रात 9:00 बजे।
मुख्य द्वार से अंदर तक बड़ी-बड़ी लाइटें झिलमिल कर रही थीं। अर्थ आवर डे के दौरान एक भी लाइट को बंद नहीं किया गया था। ऐसा लगा ही नही कि साहब को अर्थ आवर डे के बारे में जानकारी भी है।
एसएसपी आवास- समय रात 9:20 बजे।
कप्तान के आवास पर भी अन्य जगहों जैसा ही हाल था। बंगले की छोटी-बड़ी सभी लाइटें जगमगा रही थीं। अर्थ आवर डे के दौरान यहां लाइट बंद नहीं की गई थीं।
डीएम आवास लाइटों में जगमगा रहा था। बंगले की अंदर-बाहर की लाइटों के साथ ही विद्युत पोल पर बड़ी-बड़ी लाइटें जगमगा रही थीं। अर्थ आवर डे के दौरान एक मिनट के लिए औपचारिक बंदी तक नहीं की गई।