14वीं सरदार संगोष्ठी एवं उत्तमचंद शाह स्मृति व्याख्यान को किया संबोधित
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। स्वतंत्रता संग्राम में बारडोली की ऐतिहासिक भूमिका है। बारडोली केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की नैतिक चेतना है। यहां अहिंसा, सामाजिक सुधार और जन-साहस की सामूहिक परीक्षा पहली बार एक साथ हुई। यह बातें दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने बृहस्पतिवार को गुजरात के बारडोली स्थित स्वराज आश्रम में कही। गुप्ता 14वीं सरदार संगोष्ठी एवं उत्तमचंद शाह स्मृति व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे।
यह कार्यक्रम सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती व उत्तमचंद शाह की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मोरारी बापू ने आशीर्वचन किया। विजेंद गुप्ता ने वीर विठ्ठलभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित कर स्वतंत्रता आंदोलन में बारडोली की अद्वितीय भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बारडोली का योगदान केवल 1928 के ऐतिहासिक बारडोली सत्याग्रह तक सीमित नहीं था, बल्कि इससे पहले भी यह क्षेत्र राष्ट्रीय आंदोलन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
उन्होंने कहा कि यद्यपि चौरी-चौरा की घटना के बाद फरवरी 1922 में असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया गया था, फिर भी बारडोली एक सिद्धांतनिष्ठ, अहिंसक जनआंदोलन के केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका था। उन्हाेंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में जाति और वर्ग की सीमाओं से ऊपर उठकर बारडोली के लोगों ने शांतिपूर्ण किंतु दृढ़ आंदोलन किया। इस कारण अगस्त 1928 में ब्रिटिश सरकार को लगान वृद्धि वापस लेनी पड़ी। इस ऐतिहासिक विजय के उपरांत बारडोली की जनता ने वल्लभभाई पटेल को सरदार की उपाधि प्रदान की। गुप्ता ने ‘दिल्ली विधान सभा प्रस्तुत शताब्दी-यात्रा : वीर विठ्ठलभाई पटेल’ शीर्षक से प्रकाशित विशेष कॉफी टेबल बुक की जानकारी भी साझा की। इस अवसर पर दिल्ली विधानसभा के सदस्य अशोक गोयल, गजेन्द्र सिंह यादव, संदीप शेरावत व स्वराज आश्रम ट्रस्ट की सचिव निरंजनाबेन कलार्थी, लोकभारती ग्रामीण नवाचार विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विशाल भदानी सहित अन्य मौजूद रहे।