सफदरजंग एन्क्लेव ए-1 मकान नंबर 313 के दरवाजे बंद हैं। घर में जैसे किसी ने वक्त को रोक दिया हो। यह घर है महाराष्ट्र के बारामती विमान हादसे में जान गंवाने वाली को-पायलट शांभवी पाठक का, जिसकी असमय मौत ने परिवार को झकझोर कर रख दिया है।
शांभवी का परिवार हाल ही में यहां शिफ्ट हुआ था। गृह प्रवेश की तारीख तय करने की बातें चल रही थीं। लेकिन, नियति को कुछ और ही मंजूर था। बेटी की मौत की खबर ने उन सभी खुशियों को एक ही पल में मातम में बदल दिया। शांभवी के पड़ोसियों ने बताया कि वह बेहद शांत और विनम्र स्वभाव की थी। वहीं, सफदरजंग एन्क्लेव में तैनात एक गार्ड ने बताया कि शांभवी अपने परिवार से बहुत जुड़ी हुई थी। नए घर को लेकर वह भी खुश थी।
मार्च में होने वाली थी की शादी
शांभवी की जिंदगी का सबसे खूबसूरत दौर शुरू होने वाला था। रिश्तेदारों ने बताया कि उसकी शादी मार्च में थी। मां अपनी बेटी के लिए नए कपड़े, गहने और भविष्य के सपने सजा रही थीं। वह एक मां थीं, जो अपनी बेटी को दुल्हन के रूप में देखने का सपना हर दिन देखती थी।
तैयारी थी डोली उठाने की, उठानी पड़ी शांभवी की अर्थी
बृहस्पतिवार को शांभवी की अंतिम विदाई में शामिल होने आए लोगों के आंसू रोके नहीं रुक रहे थे। करीब 25 साल की शांभवी पाठक वीएसआर वेंचर्स के लियरजेट-45 विमान में फर्स्ट ऑफिसर (पायलट) थीं। उनकी मां वायुसेना के बाल भारती स्कूल में शिक्षिका हैं। उनके पिता वायुसेना से सेवानिवृत्त पायलट हैं। उनका छोटा भाई नौसेना में कार्यरत है। पड़ोस में ब्यूटी पार्लर चलाने वाली शिल्पी कहती हैं, शांभवी बेहद सुलझी हुई, मीठी और शांत स्वभाव की लड़की थी। सुरक्षा गार्ड जितेंद्र बताते हैं कि शांभवी जब भी दिखती थीं, हमेशा नमस्ते करती थीं। उनका परिवार बेहद विनम्र था और समाज में सबका सम्मान करता है।