हापुड़ जिले के गांव दत्तियाना निवासी किसान रजनीश त्यागी ने कोरोना संकट में पारंपरिक खेती से हटकर कामयाबी के लिए नई राह चुनी। रजनीश ने केले की खेती और पौधशाला का ऑनलाइन कारोबार शुरू किया। वह अपनी नर्सरी से केले के पौध की ऑनलाइन बिक्री कर रहे हैं और किसानों को प्रशिक्षण देकर सफल होने का मंत्र भी बता रहे हैं।
किसान रजनीश त्यागी पहले गन्ने की खेती करते थे। रजनीश बताते हैं कि गन्ने की फसल से सीमित आय होती थी। हर साल गन्ना भुगतान की विकट समस्या के कारण उन्होंने खेती में बदलाव किया।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर रजनीश ने केले की खेती शुरू की। शुरूआत में उन्होंने महज पांच बीघा जमीन में केले की फसल लेनी शुरू की। पहले ही सीजन में उन्हें 50 हजार रुपये बीघा की आमदनी हुई। इसके बाद उन्होंने 60 बीघा जमीन में केले की खेती शुरू की।
दोनों बेटों ने की मदद
कोरोना काल में रजनीश त्यागी ने केले की खेती के साथ ही इसकी नर्सरी भी तैयार करनी शुरू कर दी। नर्सरी में करीब सवा दो लाख पौधे तैयार किए। केले की फसल जुलाई में लगती है लेकिन बीते तीन माह से लॉकडाउन और अनलॉक के दौर में जब बाकी कारोबार प्रभावित थे तब रजनीश अपने खेत में केले की पौध तैयार कर रहे थे। पौधों की बिक्री के लिए उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया।
रजनीश के बेटे देवांश व वेदांश ग्रेजुएशन के छात्र हैं। इन दोनों ने रजनीश त्यागी के नाम से एक फेसबुक पेज बनाया। कृषि संबंधी वेबसाइट्स, यूट्यूब चैनल पर अपनी पौधशाला व खेती के वीडियो अपलोड किए। इस तरह उन्होंने पौधों की ऑनलाइन बिक्री शुरू की।
समूचे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में डंका...
बागपत, मुरादाबाद, बरेली और अमरोहा तक के किसान उनके यहां पौध लेने और केले की खेती की जानकारी लेने आ रहे हैं। रजनीश कहते हैं कि किसान हमेशा मौसम और प्रकृति के प्रकोपों के वक्त में भी जीने और फसल उगाने के रास्ते तलाशता है। खराब वक्त में संघर्ष की कला उन्हें विरासत में मिली है। रजनीश त्यागी को जिला स्तर पर कृषि, उद्यान विभाग द्वारा आयोजित होने वाले किसान सम्मान समारोह में पुरस्कृत भी किया जा चुका है।
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