पीठ ने कहा, सरकार के आदेश पर उठाया गया कदम तय लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में सबसे कम पाबंदी लगाने वाला रास्ता है। सरकार को कानून के तहत किसी भी ऑनलाइन जानकारी तक जनता की पहुंच को ब्लॉक करने का अधिकार है। टेलीग्राम तक जनता की पहुंच को अस्थायी रूप से रोकने के केंद्र सरकार के कदम को अनुचित या सख्त नहीं माना जा सकता। गौरतलब है कि केंद्र ने टेलीग्राम को 22 जून तक प्रतिबंधित करने के साथ ही मैसेज एडिटिंग फीचर 30 जून तक बंद करने का आदेश दिया है।
व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगा सकते हैं रोक
फैसले के मुताबिक, कानून के तहत सरकार या किसी भी अधिकारी को किसी कंप्यूटर संसाधन में तैयार, भेजे गए, संग्रहीत या होस्ट किए गए किसी भी विवरण को ब्लॉक करने का निर्देश देने का अधिकार है। बशर्ते सरकार संतुष्ट हो कि ऐसा कदम देश की संप्रभुता व अखंडता, रक्षा, विदेशी सरकारों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने या किसी संज्ञेय अपराध को बढ़ावा देने से रोकने के लिए जरूरी है।
केंद्र की दलीलों को स्वीकारा
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों का संज्ञान लेते हुए फैसले में कहा गया कि टेलीग्राम पर परीक्षा से जुड़ी गलत खबरें और कथित प्रश्नपत्र प्रसारित होने से कानून-व्यवस्था बिगड़ने का गंभीर खतरा था। धोखाधड़ी व अवैध गतिविधियों के लिए टेलीग्राम का दुरुपयोग किया जा रहा था।
केवल लक्षित कदम उठाना पर्याप्त नहीं
कोर्ट ने कहा, किसी विशेष चैनल या समूह को हटाने के बाद भी टेलीग्राम पर आसानी से नए या मिरर चैनल बनाए जा सकते हैं। पुराने सब्सक्राइबर्स को इन नए चैनलों से जोड़कर गैर-कानूनी गतिविधियां दोबारा शुरू की जा सकती हैं। ऐसे में कुछ चैनलों, बॉट्स या अकाउंट्स को हटाने जैसे लक्षित कदम पर्याप्त नहीं हैं। इसमें एडिट फीचर का दुरुपयोग करके यह दिखाया जा सकता है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक हो गया था। इससे छात्रों में भ्रम की स्थिति बन सकती है।
इसलिए खतरा
यह एप क्लाउड सिस्टम पर काम करती है। फोन नंबर की जगह यूजरनेम का इस्तेमाल करने की सुविधा से यूजर्स की पहचान छिपी रहती है, जिससे अवैध प्रकृति की सामग्री समेत किसी भी जानकारी को तेजी से फैलाने में मदद मिलती है।