पहले एंडोस्कोपी से बाल निकालने की कोशिश हुई पर गुच्छा 9x5 सेंटीमीटर के आकार का और बहुत सख्त था, इसलिए छोटे चीरे लगाकर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई। खास बैग की मदद से पूरा गुच्छा बाहर निकाला गया। डॉ. अरुण भारद्वाज ने बताया कि सर्जरी के दो दिन बाद ही मरीज घर चला गया। उसे न कोई ट्यूब लगी न ड्रेन। अब वह ठीक है और सामान्य खाना खा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, यह बीमारी अक्सर बाल खींचने या बाल खाने की आदत से होती है। मरीज ने बचपन में किसी के कहने पर बाल खाना शुरू कर दिया था, जिससे उसे यह बीमारी हो गई।