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अब केंद्र के पाले में घर-घर राशन पहुंचाने की योजना, पढ़ें एलजी की आपत्तियां और सरकार के जवाब

Thu, 22 Mar 2018 11:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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kejriwal - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली सरकार की घर-घर राशन पहुंचाने की योजना की फाइल अब केंद्र के पाले में है। उपराज्यपाल अनिल बैजल ने योजना मंजूर करने से पहले केंद्र से सलाह मांगी है। वहीं, प्वाइंट टू सेल स्कीम को स्थगित करने के दिल्ली कैबिनेट के प्रस्ताव को मंजूर नहीं किया गया है।

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दिल्ली सरकार ने एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि कानूनन डोर स्टेप डिलीवरी योजना पर केंद्र की राय लेने की जरूरत नहीं है। फाइल केंद्र को भेजने से राजधानी के गरीबों की राशन से जुड़ी समस्याएं बढ़ेंगी।

दिल्ली कैबिनेट ने योजना को मंजूर करने से विशेषज्ञों से विमर्श किया था। अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार है। इसकी शिकायतें मिलने के बाद ही योजना पर काम शुरू हुआ था।
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मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का आरोप है कि कैबिनेट के फैसले को कुछ नौकरशाहों की सलाह पर उपराज्यपाल ने जानबूझकर मंजूरी नहीं दी है। इससे नौकरशाहों और राशन माफिया के गठजोड़ की आशंका सही साबित होती है।

मुख्यमंत्री का एतराज

kejriwal - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि यह बेहद दुखद है कि उपराज्यपाल ने डोर स्टेप डिलीवरी ऑफ राशन स्कीम को नामंजूर कर दिया है। मैंने बार-बार गुजारिश की थी कि योजना पर कोई फैसला लेने से पहले चर्चा कर लें, लेकिन उपराज्यपाल ने इसे दरकिनार कर दिया।

आम लोगों के लिए बनाई गई बेहतरीन योजना राजनीति का शिकार हो गई है। वहीं, आधार नंबर पर चलने वाली प्वांइट टू सेल योजना से राशन खरीदारों को बड़े पैमाने पर समस्या हो रही है। उपराज्यपाल के इस कदम से गरीबों को राशन न मिलने की समस्या का सामना करना पड़ेगा।

राजनिवास का जवाब
एलजी अनिल बैजल का कहना है कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि डोर स्टेप डिलीवरी ऑफ राशन का प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया है। दिल्ली को एक कुशल सार्वजनिक वितरण प्रणाली की जरूरत है, जिससे लाभार्थियों का हक कोई दूसरा न मार सके।

वित्त विभाग की राय है कि डायरेक्ट बेनिफट स्कीम लागू करने से योजना में लगने वाले पैसे से हर लाभार्थी 5 किलो अतिरिक्त आटा खरीद सकता है। 2012-13 में इसी तरह आटा देने की योजना शुरू हुई थी, लेकिन उसके परिणाम उत्साहजनक नहीं थे। उससे सबक नहीं लिया गया।

प्रस्ताव में यह भी नहीं बताया गया है कि पिछली गलती को कैसे सुधारा जाएगा। ऐसी हालत में योजना पर फैसला लेने से पहले इसकी जानकारी केंद्र सरकार को भेजी जाए। वहीं, भ्रष्टाचार रोकने के लिये प्वाइंट टू सेल योजना शुरू हुई थी। इसे अचानक रोकने से विश्वसनीयता का संकट पैदा होगा। लिहाजा इस फैसले का पुनर्विचार जरूरी है।
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एलजी की आपत्तियां और सरकार के जवाब

kejriwal - फोटो : अमर उजाला
एलजी की आपत्तियां और सरकार के जवाब

1. उपराज्यपाल का कहना है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 की धारा 12 (2)(एच) के तहत योजना को केंद्र की पूर्व मंजूरी जरूरी है। 
सरकार का मानना है कि उपराज्यपाल इस प्रावधान पर भ्रमित हैं। दिल्ली कैबिनेट ने अधिनियम की धारा 12 (1) के तहत योजना को मंजूरी दी है, 12 (2)(एच) के तहत नहीं। जिस सेक्शन में योजना को मंजूरी दी गई है, उसमें पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं है। 
2. उपराज्यपाल के अुनसार, केवल वरिष्ठ नागरिकों व दिव्यांगों के लिए ही केंद्र डोर स्टेप डिलीवरी योजना को मंजूर किया है। 
दिल्ली सरकार का कहना है कि वह केंद्र की योजना का ही विस्तार कर रही है। इसके दायरे में राशन के सभी लाभार्थी होंगे। इससे राशन वितरण व्यवस्था की खामियां दूर होंगी। 
3. उपराज्यपाल का कहना है कि गरीबों को मिली किसी भी सुविधा का बेजा इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। 
सरकार का मानना है कि योजना के गलत इस्तेमाल की गुंजाइश ही नहीं है। राशन की डिलीवरी बॉयोमेट्रिक पहचान से ही होगी। इससे बीच के ठेकेदार व राशन माफिया गायब हो जाएंगे। 
4. उपराज्यपाल का कहना है कि राशन वितरण व्यवस्था में यह सिर्फ चेहरे बदलने की कवायद है। दुकानदार की जगह डिलीवरी मैन ले लेगा। 
सरकार का मानना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी। अभी खुले में राशन दिया जाता था। योजना से पूरी तरह पैकिजिंग करके राशन पहुंचाया जाएगा। 
5. उपराज्यपाल का मानना है कि योजना लागू करने से खजाने पर 250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
सरकार का कहना है कि योजना पर कुछ भी अतिरिक्त खर्च नहीं होगा। अभी दुकानदार को प्रति किलोग्राम पर दो रुपये की मार्जिन मनी मिलती है। इसी राशि को होम डिलीवरी स्कीम में दे दिया जाएगा। 
6. उपराज्यपाल का कहना है कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) बेहतर विकल्प है। इसमें धनराशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुंच जाएगी और बिचौलिए पूरी तरह खत्म होंगे। 
दिल्ली सरकार पहले ही डीबीटी को रद्द कर चुकी है। सरकार का यह फैसला अंतिम है।
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