मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि यह बेहद दुखद है कि उपराज्यपाल ने डोर स्टेप डिलीवरी ऑफ राशन स्कीम को नामंजूर कर दिया है। मैंने बार-बार गुजारिश की थी कि योजना पर कोई फैसला लेने से पहले चर्चा कर लें, लेकिन उपराज्यपाल ने इसे दरकिनार कर दिया।
आम लोगों के लिए बनाई गई बेहतरीन योजना राजनीति का शिकार हो गई है। वहीं, आधार नंबर पर चलने वाली प्वांइट टू सेल योजना से राशन खरीदारों को बड़े पैमाने पर समस्या हो रही है। उपराज्यपाल के इस कदम से गरीबों को राशन न मिलने की समस्या का सामना करना पड़ेगा।
राजनिवास का जवाब
एलजी अनिल बैजल का कहना है कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि डोर स्टेप डिलीवरी ऑफ राशन का प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया है। दिल्ली को एक कुशल सार्वजनिक वितरण प्रणाली की जरूरत है, जिससे लाभार्थियों का हक कोई दूसरा न मार सके।
वित्त विभाग की राय है कि डायरेक्ट बेनिफट स्कीम लागू करने से योजना में लगने वाले पैसे से हर लाभार्थी 5 किलो अतिरिक्त आटा खरीद सकता है। 2012-13 में इसी तरह आटा देने की योजना शुरू हुई थी, लेकिन उसके परिणाम उत्साहजनक नहीं थे। उससे सबक नहीं लिया गया।
प्रस्ताव में यह भी नहीं बताया गया है कि पिछली गलती को कैसे सुधारा जाएगा। ऐसी हालत में योजना पर फैसला लेने से पहले इसकी जानकारी केंद्र सरकार को भेजी जाए। वहीं, भ्रष्टाचार रोकने के लिये प्वाइंट टू सेल योजना शुरू हुई थी। इसे अचानक रोकने से विश्वसनीयता का संकट पैदा होगा। लिहाजा इस फैसले का पुनर्विचार जरूरी है।