दिल्ली में सड़कों के नामकरण के मामले में कई साल से राजनीति हो रही है। करीब ढाई साल पहले औरंगजेब रोड का नाम बदलने के मामले में जमकर रस्साकशी चली थी। इसी बीच, एनडीएमसी ने 28 अगस्त 2015 को औरंगजेब रोड का नाम बदलकर एपीजे कलाम रोड किया था।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस बारे में ट्वीट कर लोगों को जानकारी दी थी। इससे पहले भाजपा सांसद महेश गिरी ने इस बारे में पत्र लिखकर औरंगजेब रोड का नाम बदलकर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर करने की मांग की थी।
औरंगजेब रोड से लेकर डलहौजी रोड तक का बदला गया नाम
बता दें कि इससे पहले भी सड़कों के नाम पर बवाल हो चुका है। पूर्व में औरंगजेब रोड का नाम बदलकर एपीजे अब्दुल कलाम मार्ग किया गया था।
देश के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को उनकी मृत्यु के बाद श्रद्धांजलि देने के लिए ऐसा किया गया था।
एनडीएमसी ने देश के पूर्व राष्ट्रपति को सम्मान देने के लिए यह कदम उठाया था। वहीं एनडीएमसी ने 2017 में डलहौजी रोड का नाम बदलकर दाराशिकोह रोड कर दिया था। दिलचस्प बात ये है कि दाराशिकोह औरंगजेब का भाई था।
रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग किया गया था। तीन मूर्ति मार्ग का नाम बदलने की भी बात थी लेकिन हो नहीं सका।
नई दिल्ली जिले के तिलक मार्ग थाने में इस संबंध में दिल्ली संपत्ति विरूपण अधिनियम (डीपीपी) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जहां महाराणा प्रताप रोड का पोस्टर लगाया गया, वहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं।
पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि आरोपियों तक पहुंच सके। एनडीएमसी के असिस्टेंट इंजीनियर जीके मिश्रा ने तिलक मार्ग थाना पुलिस को बुधवार दोपहर को शिकायत दी थी। बुधवार शाम तक इस मामले में किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया था।