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Delhi Fire: अस्पताल अग्निकांड पर सौरभ भारद्वाज ने ली बैठक, नियमों में होगा बदलाव; फायर ऑडिट की जांच के आदेश

Mon, 27 May 2024 10:03 AM IST
अनुज कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Delhi Hospital Fire Update News: दिल्ली के एक बेबी केयर अस्पताल में लगी आग के बाद स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने बैठक बुलाई। भविष्य में पंजीकरण या नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वाली ऐसी इकाइयों के लिए स्वास्थ्य विभाग विशेष जांच करेगा।
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अस्पताल अग्निकांड पर सौरभ भारद्वाज ने बुलाई बैठक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में बीते शनिवार की रात बेबी केयर न्यू बॉर्न अस्पताल में आग भीषण आग लग गई। इस हादसे में सात मासूमों की मौत हो गई। हादसे के बाद राष्ट्रपति, उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने दुख जताया। एलजी वीके सक्सेना और स्वास्थ्य मंत्री ने जांच के आदेश दे दिए हैं।

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स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज की अध्यक्षता में बुलाई गई आपातकालीन बैठक में यह फैसला लिया। बैठक में अधिकारियों ने मंत्री को पूरी घटना के बारे में जानकारी दी। बताया गया कि ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर के साथ नौ मीटर की ऊंचाई तक स्थित नर्सिंग होम के लिए फायर एनओसी की आवश्यकता नहीं है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में ऐसे छोटे नर्सिंग होम हैं जो नौ मीटर के मानदंड का पालन करते हैं, लेकिन भविष्य में पंजीकरण या नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वाली ऐसी इकाइयों के लिए स्वास्थ्य विभाग विशेष जांच करेगा।

इसमें आग से बचाव को विशेष प्राथमिकता देते हुए जांच होगी। इसके लिए चेक लिस्ट में कुछ निवारक कदम जोड़े जाएंगे। इसमें देखा जाएगा कि नौ मीटर तक के नर्सिंग होम के पास पर्याप्त ओवरहेड टैंक क्षमता वाले वाटर स्प्रिंकलर, स्मोक डिटेक्टर, अग्निशामक यंत्र और नियमित विद्युत ऑडिट का स्पष्ट प्रावधान है या नहीं। यदि ऐसा नहीं होता है तो डीजीएचएस भविष्य में नर्सिंग होम का पंजीकरण या उसका नवीनीकरण नहीं करेगा।
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प्रेस वार्ता में मंत्री ने कहा कि सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को 8 जून तक अपने-अपने अस्पतालों की फायर ऑडिट की कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करवाने को कहा गया है। अस्पतालों को अपने इलेक्ट्रिकल सिस्टम की जांच करने के भी आदेश दिए हैं। गर्मियों के मौसम में अक्सर शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगने की घटनाएं देखी जाती हैं।

अनधिकृत ऑक्सीजन रिफिलिंग की होगी जांच
अस्पताल में अनधिकृत ऑक्सीजन रिफिलिंग की जांच होगी। स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस व जिला मजिस्ट्रेट से मांगी है। दोषी पाए जाने पर स्वास्थ्य कार्रवाई करेगा। इसके अलावा अस्पताल का लाइसेंस खत्म हो गया था। इस संबंध में मामले की मुख्य फाइल सतर्कता विभाग को भेज दी गई है।

डीजीएचएस को भविष्य के संदर्भ के लिए फाइल की एक प्रति रखने की सलाह दी गई। मंत्री ने कहा कि ऑक्सीजन से आग बहुत जल्दी बढ़ती है तो इसलिए हर जगह ऑक्सीजन रिफिलिंग के काम को नहीं किया जा सकता, इसके कुछ प्रावधान होते हैं, इसके लिए सरकार से अनुमति लेनी होती है I

मालिक के खिलाफ कोर्ट में दो मामले लंबित
बैठक में डीजीएचएस ने बताया कि नर्सिंग होम का मालिक डिफॉल्टर रहा है। मालिक के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने पहले से दो मामले दर्ज कराए हुए हैं। इन मामलों की तीस हजारी कोर्ट और कड़कड़डूमा कोर्ट में जांच लंबित हैं। सूत्रों का कहना है कि विभाग इन दोनों मामलों में जांच को तेजी से आगे बढ़ाएगा ताकि आरोपी को जल्द से जल्द सजा दिलवाई जा सके।

मंत्री ने बताया कि नर्सिंग होम के मालिक पर एक मामला औचक निरीक्षण के दौरान कुछ कमियां पाई गई थीं, उस संबंध में चल रहा है। इसी प्रकार से इस अस्पताल के मालिक को बिना रजिस्ट्रेशन के एक अस्पताल चलाते हुए पकड़ा गया था, दूसरा मुकदमा उस मामले में चल रहा है। मंत्री ने कहा कि उम्मीद है कि जल्द ही इन मामलों में इस नर्सिंग होम के मालिक के खिलाफ अदालत का फैसला आएगा और उसे कड़ी सजा सुनाई जाएगी I

मदद करने वालों को सम्मानित करेगी सरकार
अस्पताल में आग लगने के बाद बच्चों की मदद करने वाली नर्स और आरडब्ल्यूए के कुछ सदस्यों को दिल्ली सरकार सम्मानित करेगी।

सभी अस्पतालों व नर्सिंग होम का होगा ऑडिट
बैठक में मंत्री ने आदेश दिया कि दिल्ली में मौजूद सभी सरकारी अस्पतालों और पंजीकृत निजी अस्पतालों का ऑडिट किया जाए ताकि उनकी अग्निशमन प्रणाली, नियमित विद्युत भार ऑडिट, ऑक्सीजन सुरक्षा, पानी के छिड़काव, नली के पाइप, स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म, प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल, निकासी योजनाओं की जांच की जा सके। मंत्री ने निर्देश दिया कि दिल्ली के सभी निजी, सरकारी अस्पताल और नर्सिंग होम्स की आठ जून तक अग्नि ऑडिट की अनुपालन रिपोर्ट भेजें।

फरिश्ते योजना से होगा घायल मासूमों का फ्री इलाज
आग में सुरक्षित बचाए गए सभी नवजात का दिल्ली के निजी अस्पताल में मुफ्त इलाज होगा। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने आदेश दिया कि घटना में बचाए गए बच्चों को दिल्ली के बेहतर निजी अस्पताल में निशुल्क उपचार दिया जाए। उन्होंने फरिश्ते योजना के तहत सुविधा देने का निर्देश दिया है। 

इसे लेकर उन्होंने स्वास्थ्य सचिव दीपक कुमार और मुख्य सचिव नरेश कुमार को निर्देश भेजे हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इस गंभीर घटना के बारे में सूचना लेने के लिए कॉल करने पर फोन नहीं उठाया। स्वास्थ्य सचिव द्वारा फोन कॉल और संदेशों का जवाब न दिए जाने के कारण मुख्य सचिव को प्रति सहित ईमेल के माध्यम से निर्देश भेजना पड़ा।

इसमें निर्देश दिया गया है कि इस घटना की शीघ्र जांच करें। साथ ही इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों या निजी व्यक्तियों के नाम और पदनाम उपलब्ध कराएं। बचाए गए बच्चों को फरिश्ते योजना के तहत इलाज दिया जाए। मृतकों और झुलसने वालों के परिवारों को शीघ्र मुआवजा दिया जाए।

हादसे के वक्त 12 नवजात थे भर्ती
जानकारी के लिए बता दें कि विवेक विहार सी-54 में बेबी केयर न्यू बॉर्न अस्पताल के नाम से छोटा सा अस्पताल है। जिसमें झुलसकर सात मासूमों की मौत हो गई। हादसे के समय अस्पताल में कुल 12 नवजात भर्ती थे। आग लगने पर पुलिस, दमकल विभाग, अस्पताल स्टाफ व पब्लिक ने किसी तरह अस्पताल की इमारत के पिछले हिस्से में मौजूद खिड़की के रास्ते सभी 12 बच्चों को निकाला गया। 
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आग लगने के पीछे शॉर्ट सर्किट
बता दें कि डॉ. नवीन अपनी पत्नी डॉक्टर जागृति के साथ मिलकर विवेक विहार, पंजाबी बाग, फरीदाबाद और गुरुग्राम में बेबी केयर न्यू बॉर्न नाम से अस्पताल चलाते हैं। फिलहाल दमकल विभाग, क्राइम टीम, एफएसएल समेत बाकी जांच एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की आग की वजह लग रही है।
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