नई दिल्ली। प्रस्तावित नेशनल फार्मेसी आयोग अधिनियम को लेकर आयुष चिकित्सकों में नाराजगी है। उनका आरोप है कि नए कानून में आयुष डॉक्टरों के अधिकार खत्म हो सकते हैं। ऑल इंडिया डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ आईएसएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आरपी पाराशर और संरक्षक डॉ. युवराज त्यागी ने इस मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।
डॉ. पाराशर ने बताया कि फिलहाल फार्मेसी एक्ट 1948 में मेडिकल प्रैक्टिशनर की परिभाषा है, जिसमें आयुष डॉक्टर भी शामिल हैं। इस एक्ट की धारा 42 के तहत रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट आयुष डॉक्टरों की पर्ची पर दवा दे सकते हैं। इसी वजह से आयुर्वेद और यूनानी डॉक्टर अपने मरीजों के लिए एलोपैथिक दवाएं लिख सकते हैं या क्लीनिक में रख सकते हैं। लेकिन, नए प्रस्तावित एक्ट में न तो मेडिकल प्रैक्टिशनर को परिभाषित किया गया है और न ही धारा 42 को रखा गया है। डॉ. पाराशर ने इसे आयुष चिकित्सक विरोधी कदम बताया और मांग की कि पुराने एक्ट की धारा दो और 42 को नए कानून में भी शामिल किया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो सुप्रीम कोर्ट में आयुष डॉक्टरों के एलोपैथिक दवा लिखने के अधिकार से जुड़े मामले पर भी गलत असर पड़ सकता है। संगठन ने सरकार से आयुष चिकित्सकों के हितों की रक्षा करने की अपील की है।