धवन ने कहा कि वह इस नक्शे को नहीं मानते। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि आप इसे न मानिए। जवाब में धवन ने कहा कि मैं फेंकना चाहता हूं और यह कहते हुए उन्होंने उस नक्शे को भरी अदालत में फाड़ दिया। जिस पर चीफ जस्टिस ने धवन से कहा कि आप इसकेऔर टुकड़े कर सकते हैं।
जिसके धवन ने उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए। सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के मुताबिक, ऐसा सुप्रीम कोर्ट में पहली बार हुआ है जब भरी अदालत में किसी दस्तावेज को फाड़ा गया। इसके चंद मिनटों के बाद सुनवाई के तौर-तरीके से नाराज चीफ जस्टिस ने कहा कि इस तरह से सुनवाई नहीं हो सकती और वह सुनवाई खत्म कर सकते हैं।
हालांकि लंच के बाद सुनवाई केदौरान धवन ने नक्शे फाडने की घटना वायरल हो गई है। धवन ने कहा कि वास्तव में मैं उस नक्शे पर फेंकना चाहता था लेकिन चीफ जस्टिस ने कहा कि वह इसे टुकड़े भी कर सकते हैं। इसके बाद नक्शे को फाड़ा। जिस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगई ने इस विवाद को खत्म करने के लिए कहा कि हां मैंने टुकड़ा करने केलिए कहा था।
अयोध्या भूमि विवाद मामला सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2010 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित था लेकिन इसकेमेरिट पर सुनवाई इसी वर्ष छह अगस्त से सुनवाई शुरू हुई थी।
मालूम हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2010 में 2.77 एकड़ वाली विवादित जगह को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्माही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 अपील दायर की गई है और यह मामला पिछले नौ वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित था।
क्या है मोल्डिंग ऑफ रिलीफ
दोनों पक्षों की ओर से अपील के दौरान जो गुहार लगाई गई है क्या इससे भी इतर आगे-पीछे क्या कुछ गुंजाइश बनती है? पक्षकारों को लिखित रूप में यह बताने केलिए कहा गया है। हालांकि यह देखने वाली बात होगी कि इस मामले में मोल्डिंग ऑफ रिलीफ सिद्धांत किस हद तक लागू किया जा सकता है।