विशेषज्ञों ने मरीजों को दी दर्द के इलाज की जानकारी, हर मरीज के लिए अलग उपचार पर दिया जोर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान (एबीवीआईएमएस) और डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल के एनेस्थीसिया विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को पुराने दर्द और पैलिएटिव केयर को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। अस्पताल की ट्रॉमा बिल्डिंग की छठी मंजिल स्थित मेडिकल सिमुलेशन सेंटर में हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मरीजों और उनके परिजनों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के निदेशक डॉ. अखिलंदेश्वरी प्रसाद और एनेस्थीसिया विभाग की प्रमुख डॉ. नीरजा बनर्जी के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने मरीजों को लंबे समय तक रहने वाले दर्द के कारणों, उसके इलाज और बेहतर जीवन जीने के लिए जरूरी देखभाल के बारे में जानकारी दी।
अस्पताल की पेन क्लीनिक के प्रभारी डॉ. अखिलेश गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में पुराने दर्द के मरीजों के लिए विशेष ओपीडी चलाई जा रही है। यह ओपीडी हर बृहस्पतिवार और शनिवार को सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में लगती है। वहीं, पैलिएटिव केयर ओपीडी प्रत्येक मंगलवार को इसी ब्लॉक में संचालित होती है। उन्होंने कहा कि दर्द का समय पर पता लगाना और मरीज की स्थिति के अनुसार इलाज करना बेहद जरूरी है। सही उपचार से मरीज की तकलीफ कम करने और उसकी रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
कमर दर्द से लेकर घुटनों के दर्द तक की जानकारी : एनेस्थीसिया विभाग की प्रोफेसर डॉ. नमिता सरस्वत ने पुराने दर्द से जुड़ी कई समस्याओं के बारे में बताया। इनमें कमर दर्द, चेहरे की नसों में दर्द, कंधे का जाम होना, घुटनों में गठिया, एड़ी के तलवे में दर्द, फाइब्रोमायल्जिया, दाद के बाद होने वाला दर्द, पेट दर्द और सिरदर्द जैसी समस्याएं शामिल हैं। वहीं, डॉ. शिवप्रिया और उनकी पैलिएटिव केयर टीम ने कैंसर के कारण होने वाले दर्द और गंभीर अवस्था में पहुंचे कैंसर मरीजों की देखभाल के बारे में जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसे मरीजों को शारीरिक तकलीफ के साथ-साथ मानसिक और भावनात्मक सहयोग देना भी जरूरी है।
आधुनिक तकनीकों से किया जा रहा दर्द का इलाज : अस्पताल में दवाओं के साथ-साथ दर्द कम करने के लिए आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जाता है। इनमें फ्लोरोस्कोपी और अल्ट्रासाउंड की मदद से की जाने वाली प्रक्रियाएं, ओजोन थेरेपी और रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन शामिल हैं। मरीज की बीमारी और जरूरत के अनुसार इन तकनीकों का चयन किया जाता है। कार्यक्रम के दौरान कई मरीजों ने इलाज से दर्द में राहत मिलने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होने की बात कही।