लॉकडाउन के बाद व्यावसायिक गतिविधियां शुरू होने से दिल्ली की सड़कों पर जाम लगना शुरू हो गया है और इसका सीधा असर वाहनों की औसत गति पर पड़ा है। राजधानी में वाहनों की औसत गति 46 किलोमीटर प्रति घंटा से घटकर 29 किलोमीटर रह गई है। यह खुलासा सोमवार को सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) ने एक रिपोर्ट में किया है।
ये रिपोर्ट इसलिए अहम है क्योंकि जाम का सीधा असर वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर पड़ता है। सीएसई का कहना है कि दोबारा जाम का लगना ये दिखाता है कि लॉकडाउन के बाद ट्रैफिक कम करने के लिए परिवर्तन के लिए दिल्ली तैयार नहीं है।
ये रिपोर्ट खरीदारी, खेलकूद, पार्क, दवा लेना, कार्यस्थल व आवास के संदर्भ में गूगल मोबिलिटी रिपोर्ट डाटा की मदद से तैयार की गई है। इस रिपोर्ट में ट्रैफिक की गति का भी विश्लेषण किया गया है। इसके अनुसार जाम बढ़ने का असर वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर पड़ेगा। यह दिल्ली के संदर्भ में बेहद अहम है।
जिन सड़कों पर ये विश्लेषण किया गया उनमें एमजी रोड, एनएच-44, सरदार पटेल मार्ग, आउटर रिंग रोड, डॉ. केबी हेडगेवार मार्ग, श्री अरबिंदो मार्ग, एनएच-9, एमबी रोड, जीटी करनाल रोड, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग, द्वारका मार्ग व नजफगढ़ मार्ग को शामिल किया गया है।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन के दौरान वाहनों की औसत गति में 90 फीसदी इजाफा हुआ और ये 24 किलोमीटर से बढ़कर 46 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई। वहीं लॉकडाउन के बाद औसत गति घटकर 29 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई है।
लॉकडाउन के दौरान पीक आवर्स में औसत गति 23 किलोमीटर से बढ़कर 44 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई थी। वहीं लॉडाउन के बाद ये गति 27 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई है।
सीएसई का कहना है कि कोरोना संक्रमण के संपर्क की आशंका के मद्देनजर सार्वजनिक वाहनों में यात्रियों की संख्या बेहद कम है और वहीं सार्वजनिक परिवहन के साधन भी अपर्याप्त हैं। सामाजिक दूरी के कारण सार्वजनिक वाहनों की यात्री क्षमता घटी है। इससे लोग निजी वाहन के प्रयोग के लिए प्रेरित हो रहे हैं।