ऑटोमैक्स कंपनी का प्लांट बंद करने का मामला तूल पकडने लगा है। पीड़ित श्रमिकों ने मंगलवार को कंपनी प्रबंधन व स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। श्रमिकों ने लघुसचिवालय में तय समय अनुसार पहुंचकर एसडीएम के साथ बैठक की है। दूसरी ओर पुलिस आयुक्त को दी शिकायत पत्र में स्थानीय पुलिस पर श्रमिकों के साथ दबाव बनाने का आरोप लगाया है। उपायुक्त के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजकर नौकरी पर वापस रखने की मांग की है।
बता दें कि ऑटो पाट्र्स बनाने वाली कंपनी ऑटोमैक्स ने कर्मचारियों को बिना नोटिस दिए 24 जून को प्लांट बंद कर दिया। सोमवार को जब कर्मचारी गेट पर पहुंचे, तो उन्हें वहां प्लांट बंद होने का नोटिस गेट पर ही चस्पा मिला। यूनियन के प्रधान दयानंद तिवारी ने बताया कि 23 जून को काम करने के बाद जब 24 जून की सुबह कर्मचारी कंपनी गेट पर पहुंचे, तो उन्हें वहां प्लांट बंद होने का नोटिस चस्पा मिला। जब इस बारे में पूछा गया, तो कंपनी को बंद करने का कारण लगातार हो रहे घाटे के चलते उत्पादन नहीं कर पाना बताया गया। जब कर्मचारियों ने इसका विरोध किया, तो कंपनी प्रबंधन द्वारा पुलिस बुलाकर उन्हें वहां से खदेड़ दिया गया।
प्लांट में काम करने वाले श्रमिकों का कहना है कि वह 20 से 25 साल से कंपनी में काम कर रहे हैं। कई साथियों ने तो काम करते वक्त कंपनी में ही अपने हाथ तक गवां दिए हैं। कंपनी के इस रवैये से सभी श्रमिक सड़क पर आ गए हैं। ऐसे में प्रशासन व श्रम विभाग कंपनी प्रबंधन के मनमाने रवैये को देखते हुए उन्हें प्लांट चालू करने का आदेश दें। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वह अपना आंदोलन तेज कर हड़ताल करेंगे।
वहीं कंपनी के अंदर खड़ी यूनियन की गाड़ियां, माल व मशीने भरकर रात के समय पुलिस बल की मौजूदगी में दूसरे प्लांट में भेज दी गई। जिसको लेकर यूनियन कर्मचारियों में रोष है।