automated driving track
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परिवहन अधिकारी ने बताया कि फेल होने वालों को घबराने की जरूरत नहीं है। उनका आवेदन पेंडिग रखा जाएगा। वह चाहे तो एक हफ्ते बाद फिर आकर टेस्ट दे सकते है। अगर वह उसमें पास होते है तो पुराने आवेदन पर ही उन्हें ड राइविंग लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा। कोई दूसरा टेस्ट ना दे इसके लिए टेस्ट लेने से पहले आवेदकों का बॉयोमैट्रिक पहचान लिया जा रहा है।
चार चरणों के टेस्ट में होंगे पास तभी मिलेगा डीएल
ऑटोमेटेड ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट में पास होने के लिए चार अलग-अलग टेस्ट लिया जाता है। पहले आपको आठ नंबर की तरह बने ट्रैक पर वाहन चलाकर दिखाना होगा।
इसके अलावा आपको अपने वाहन रिवर्स गियर में चलाना होगा। रिवर्स गियर में अंग्रेजी का यस जैसे बने ट्रैक पर वाहन चलाना होगा। इसके अलावा पैरेलल पार्किंग लगाना होगा। चौथे आखिरी चरण में आपको एक चढ़ाई वाले रास्ते (ट्रैक) पर वाहन चलाना होगा।
सेंसर्स इस दौरान आपके ड्राइविंग पर नजर रखेगा। अगर आपने इस दौरान कोई भी गलती की तो ऑटोमैटिक कंप्यूटर आपको फेल कर देगा। इस टेस्ट के चालू होने के बाद रोजाना कुल टेस्ट देने वालों में से आधे से ज्यादा लोग फेल हो रहे है।