दिल्ली-एनसीआर के बीच बेरोकटोक ऑटो चलाने की योजना फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रही है, क्योंकि अब शर्तों का पेंच इस योजना में फंस गया है। योजना का खाका तैयार कर चुके उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग को दिल्ली से ग्रीन सिग्नल मिलने का इंतजार है।
सरकारी उदासीनता एनसीआर ऑटो परमिट योजना की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि बहुत जल्द योजना अमल में आएगी, लेकिन अड़चनें दूर होने का नाम नहीं ले रही हैं।
दरअसल, कागजों में जितनी आसानी से योजना का खाका खींचा गया, उतनी आसानी से एनसीआर में बेरोकटोक ऑटो दौड़ा पाना मुश्किल लग रहा है।
यूपी परिवहन विभाग के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो एक बार फिर दिल्ली परिवहन विभाग ने हाथ पीछे खींच लिए हैं। बढ़ते ट्रैफिक से जूझ रही दिल्ली की सड़कों पर एनसीआर परमिट के तहत दूसरे शहरों के ऑटो भीड़ बढ़ाएंगे।
इसी बात का हवाला देते हुए दिल्ली की ओर से एकतरफा परमिट जारी करने की दलील दी गई है, लेकिन यूपी ने इस पर आपत्ति जताई है।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक नियमानुसार जितनी संख्या में दिल्ली की ओर से परमिट जारी होंगे। उतनी ही संख्या में गाजियाबाद और नोएडा से परमिट जारी किए जाएंगे।
केवल दिल्ली के परमिट पर नोएडा और गाजियाबाद में ऑटो संचालन नहीं किया जा सकता। ऑटो परमिट योजना को रफ्तार देने के लिए दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच वार्ता होनी थी, लेकिन दिल्ली की ओर से इसके संकेत नहीं मिले हैं।