जिले में 23 हजार से अधिक ऑटो हैं और एक में भी मीटर नहीं है और हालत भी काफी जर्जर हैं। मगर जब भी वाहन चालक ऑटो को फिटनेस के लिए लेकर जाते हैं तो मीटर से लेकर सभी वस्तुएं उसमें होती हैं और फिटनेस के बाद हालत पहले जैसी जर्जर हो जाते हैं और मीटर आदि सब कुछ उतार दिए जाते हैं। यह खेल केवल फिटनेस के लिए होता है। जिसमें ऑटो चालक या मालिक को केवल 500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं और वाहन चकाचक हो जाता है।
दरअसल, नोएडा में करीब 19 हजार ऑटो को परमिट हैं। जबकि 4 हजार ऑटो दिल्ली एनसीआर के चलते हैं। मगर फिटनेस कराने के दौरान तो सभी ऑटो में मीटर, स्पीडो मीटर, तीन से अधिक सीट नहीं होती हैं और सभी टायर और लाइट आदि नए सामान होते हैं। मगर फिटनेस होने के बाद ही ऑटो कुछ घंटे में पहले जैसी जर्जर हालत में हो जाते हैं।
यह कोई कहानी नहीं है बल्कि ऑटो चालकों द्वारा फिटनेस से पहले ऑटो को एक दुकान पर ले जाते हैं। जहां पर 400 से 500 रुपये देकर नए टायर, नई लाइट, टूटा हुआ सामान, स्पीडो मीटर आदि जो भी सामान फिटनेस के समय होने चाहिए वह सभी पूरे दिखाए जाते हैं।
ऑटो चालक फिटनेस कराने के बाद वापस दुकान पर जाता है और दुकान से लगवाए सामान को उतरवाकर अपना पुराना सामान लगवा लेता है और फिटनेस सर्टिफिकेट को लेकर एक साल तक घूमता है। जब भी अधिकारी पूछते हैं तो फिटनेस सर्टिफिकेट को दिखा देते हैं। हालांकि उस समय मीटर और स्पीडो मीटर के अलावा टायर और लाइट आदि सभी पुराने होते हैं।
क्या है खेल
ऑटो को दुरुस्त रखने के लिए चालकों को कई हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। मगर हजारों का काम नोएडा में सैकड़ों में पूरा हो जाता है। नोएडा में ऑटो चालकों के लिए कई ऑटो पार्ट्स दुकानदार ने ऐसी व्यवस्था कर रखी है कि छोटा-मोटा सामान बदलवाओ और 500 रुपये देकर ऑटो को चकाचक करा लेते हैं। इसमें टूटी हुई लाइटें, नए टायर-रिम समेत, पर्दा, मीटर और स्पीडो मीटर आदि लगाकर दिए जाते हैं। फिटनेस कराने के बाद चालक वापस दुकान पर जाते हैं और दुकानदार का सामान उतरवाकर अपना पुराना सामान लगवा देते हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
जब भी ऑटो या किसी अन्य वाहन की फिटनेस कराई जाती है तो पूरी तरह चेक करके ही उसे पास कराया जाता है। उसमें देखा जाता है कि मीटर चालू है या नहीं, स्पीडो मीटर लगा है या नहीं और टायर व लाइट आदि ठीक है। इसके बाद ही फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया जाता है।
बीडी मिश्रा, आरआई।
किसी वाहन की फिटनेस सर्टिफिकेट को देखा तो जाता ही है साथ ही अगर उसमें कुछ खामी दिखती है तो भी उसका चालान या जब्त करने की कार्रवाई की जाती है। हालांकि अकेले मीटर पर अभी जिले में ऑटो पर कार्रवाई नहीं की जाती है। मगर खराब हालत मिलने पर उनको जब्त कर लिया जाता है। प्रशांत तिवारी, एआरटीओ प्रवर्तन