धार्मिक उन्माद का सबसे ज्यादा शिकार महिलाएं व बच्चे होते हैं। अटाली गांव में सोमवार को जो कुछ भी हुआ वह इन्हें हिला देने के लिए काफी था। सिटी थाना परिसर में बनाए गए राहत शिविर में सैंकड़ों की संख्या में भूखे-प्यासे लोग उस दिन को याद करते हुए कांप उठते हैं।
सियासत ने ऐसी चाल चली कि दो समुदाय को आमने-सामने कर दिया। 40 वर्षीय जन्नत अपने आंसूओं को रोक नहीं पा रही हैं। कहती हैं कि यदि पुलिस वाले रुक जाते तो यह घटना नहीं होती। जो लोग उनके हर सुख-दुख में हिस्सा बनते थे वो उस दिन खून के प्यासे हो गए।
धार्मिक उन्माद से भरे युवाओं ने घर के गेट तोड़ दिए। बच्चों पर पेट्रोल छिड़कने की कोशिश की। मुझे बचाओ, मैं तुम्हारी बहू हूं। आग मत लगाना। बच्चे मर जाएंगे...। सब सब अनुरोध जन्नत ने किए थे। यह बताते हुए वह फूट-फूटकर रोकने लगती है।