राजधानी में 15 अप्रैल से लागू सम-विषम योजना शनिवार को खत्म हो गया। सरकार ने दावा किया है कि दूसरे चरण की यह योजना पहले की तुलना में ज्यादा सफल रही। मगर तीसरे चरण को लेकर सरकार अभी चुप है।
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सरकार ने कहा कि अब दोनों चरणों की तुलनात्मक अध्ययन की जाएगी। इसके लिए एक कमेटी बनाई गई है जिसकी रिपोर्ट पर आगे लागू करने का फैसला होगा। फिलहाल सरकार ने योजना की सफलता के लिए इसमें शामिल सभी एजेंसियों, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस समेत दिल्लीवालों को धन्यवाद दिया है।
परिवहन मंत्री गोपाल राय ने कहा कि दूसरा चरण पहले की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण था। स्कूल खुले थे, गर्मी पड़ रही थी, विरोधी इसे लगातार फेल करने की कोशिश कर रहे थे। फिर भी दिल्लीवालों ने इसमें उत्साह से हिस्सेदारी की।
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दिल्ली ने दोबारा सम-विषम किया सफल
यही वजह रही कि पहले फेज के दस हजार से ज्यादा चालान की तुलना में इस बार करीब नौ हजार चालान कटे। उन्होंने कहा कि दिल्ली के सात प्वाइंट को छोड़ दें तो कही भी सड़क पर दिक्कत नहीं आई।
इसे राजधानी में फिर कब लागू किया जाएगा इसपर गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली ऐसा शहर है जिसने इसे दोबारा सफल बनाकर इतिहास रचा है। इसलिए जनता तो तैयार है। उन्होंने कहा कि अब हमारे पास दो मॉडल हैं। पहला ठंड में जबकि स्कूल बंद थे।
दूसरा अप्रैल जबकि स्कूल भी खुले थे और गर्मी भी पड़ रही थी। दोनों मौसम में लागू इस फॉर्मूला का एक कमेटी अध्ययन करेगी। परिवहन विभाग के स्पेशल कमिश्नर केके दहिया के नेतृत्व में बनाई गई यह कमेटी दोनों फेज का अध्ययन कर दस मई को अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी। उसके बाद इसपर फैसला लिया जाएगा।
प्रदूषण आकलन में अब भी विरोधाभास जारी
सम-विषम का असर
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
सम-विषम योजना के दूसरे चरण के बाद दिल्ली सरकार और विभिन्न एजेंसियों के प्रदूषण आकलन में अब भी विरोधाभास जारी है। दिल्ली सरकार का कहना है कि सम-विषम योजना के दौरान प्रदूषण स्तर में कमी आई है। वहीं, विभिन्न एजेंसियों के आंकड़े बताते हैं कि सम-विषम के दौरान वायु प्रदूषण में इजाफा हुआ है।
दिल्ली सरकार ने शनिवार को बताया कि सम-विषम के दौरान वायु प्रदूषण संबंधी प्राइमरी रिपोर्ट यह बताती है कि भीतरी इलाकों में प्रदूषण का स्तर घटा है वहीं बॉर्डर इलाकों में वायु गुणवत्ता ठीक नहीं है।
सम-विषम योजना के बाद 6 मई तक वायु प्रदूषण की जांच होती रहेगी। पर्यावरण पर सम-विषम योजना के प्रभाव को लेकर फाइनल रिपोर्ट 9 मई को जारी की जाएगी।
वायु प्रदूषण में 23 फीसदी की बढ़ोतरी
Odd Even in Delhi
- फोटो : अनिल कुमार
सम-विषम स्कीम के दौरान वायु प्रदूषण में 23 फीसदी का इजाफा हुआ है। यह अध्ययन इंडिया स्पेंड पोर्टल के जरिये किया गया है। इंडिया स्पेंड ने सेंसर्स के जरिये राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण स्तर को जुटा रहा था।
रिपोर्ट के मुताबिक 15 अप्रैल से 29 अप्रैल के बीच पीएम 2.5 का औसत 68.98 व पीएम10 का औसत 134.39 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा। जबकि सम-विषम के पहले चरण में पीएम2.5 का सामान्य स्तर 56.17 और 110.04 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा था।
वहीं द एनर्जी रिसोर्सेज एंड इंस्टीट्यूट (टेरी) की ओर से दिल्ली-एनसीआर में रोजाना मापे जा रहे वायु प्रदूषण के आंकड़े दिल्ली सरकार के आंकड़ों से मेल नहीं खा रहे।
क्या कहती है टेरी की रिपोर्ट
सम-विषम का सूरत-ए-हाल
- फोटो : विवेक निगम/अमर उजाला, नई दिल्ली
टेरी के जरिये शनिवार को जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक, 29 अप्रैल को दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचा। मसलन दिल्ली-एनसीआर के अधिकांश स्थानों पर पर्टिकुलेट मैटर 2.5 अपने तय मानक से 4 गुना तक ज्यादा रिकॉर्ड किया गया। वहीं पीएम10 में भी 2.5 गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की गई।
टेरी के मुताबिक सम-विषम का दूसरा हफ्ता ज्यादा प्रदूषित रहा। पहले हफ्ते के मुकाबले दूसरे हफ्ते में पीएम 2.5 में 37 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई। वहीं पीएम 10 में 46 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
टेरी ने इस बढ़ोतरी का कारण हवा की गति मंद पड़ने और बाहरी प्रदूषण को बताया है।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण घटाने में सम विषम योजना के कारगर नहीं रहने पर आश्चर्य जताया है। अदालत ने शनिवार को कहा कि दिल्ली सरकार की इस अति प्रचारित योजना ने काम क्यों नहीं किया। यही नहीं वायु की गुणवत्ता सुधारने के लिए उठाए गए बाकी कदम भी काम क्यों नहीं कर रहे।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अगुवाई वाली पीठ ने प्रदूषण स्तर घटाने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा कि सम विषम योजना और ट्रकों के राजधानी से डायवर्जन के बाद भी दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में कोई अंतर क्यों नहीं आया।
पहले ट्रक दिल्ली के बीच से होकर गुजरते थे। अब वे बाहर से जाते हैं लेकिन इससे वायु की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ा है। इस पर आटोमोबाइल कंपनियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि प्रदूषण के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। सड़कों की धूल से 38 और उद्योगों से 11 प्रतिशत प्रदूषण होता है। जब तक वास्तविक प्रदूषकों को नहीं रोका जाएगा, तब तक कोई असर नहीं दिखेगा।