प्रदूषण का जहर धीरे-धीरे शहर वासियों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अजेय अग्रवाल ने बताया कि प्रदूषण के कारण सांस से संबंधित रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सेक्टर-20 निवासी अस्थमा के मरीज बुजुर्ग (80) को शहर में फैले प्रदूषण के कारण सांस लेने में परेशानी हो रही थी। ऐसे में उन्हें परिजन कैलाश अस्पताल ले गए। बुजुर्ग की स्थिति जटिल होने से डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। इस पर परिजन उन्हें बुधवार को जिला अस्पताल ले आए। यहां मरीज को बचाने की काफी कोशिशें की गईं, लेकिन अस्थमा के कारण मरीज की हालत बेहद खराब थी उन्हें बचाया नहीं जा सका। प्रदूषण के कारण नोएडा में पहली मौत हुई है।
रोजाना आ रहे ओपीडी में 150 सांस के रोगी
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. संतराम ने बताया कि इस समय सबसे ज्यादा लोग सांस से संबंधित रोगों के आ रहे हैं। रोज ओपीडी में करीब 150 मरीज आते हैं। अस्पताल में आईसीयू न होने से हालात और मुश्किल हो जाते हैं, क्योंकि गंभीर स्थिति में आए मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत होती है।
मास्क का करें इस्तेमाल
सीएमओ डॉ. अनुराग भार्गव के अनुसार, अधिक प्रदूषण में टहलने से गर्भवती के गर्भ को खतरा हो सकता है। प्रदूषण ब्रेन स्ट्रोक का कारण भी बन सकता है। साथ ही, त्वचा, हृदय, पेट संबंधी परेशानियों का कारण बनता है। जितना हो सके, प्रदूषण से बचें। बाहर जाते वक्त मास्क का इस्तेमाल करें। यदि टहलने की आदत है तो ज्यादा सुबह या रात के वक्त न टहलें। थोड़ी धूप निकलने के बाद ही टहलने जाएं।